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9 सौ साल पुराने गोबर गणेश की कहानी, जानिए उल्टे स्वास्तिक का महत्व

gobar ganesh mandir

महेश्वर। बप्पा के आपने अब तक एक से बढकर एक विश्वप्रसिद्ध मंदिरों के बारे में सुना और देखा होगा, लेकिन हम आपको आज एक अनोखे मंदिर के बारे में बताने जा रहे हैं जो कि है तो । यहां मंदिर का आकार भी बड़ा ही अनोखा दिखाई देता है जो कि भक्तों को पूरी तरह से हैरान कर देता है। यह मूर्ति तकरीबन नौ सौ साल पुरानी बतायी जाती है।

गणपति का ये रुप मन मोह लेता है और हैरान भी करता है क्योंकि यहां गणपति को गोबर गणेश gobar ganesh mandir के नाम से पुकारते हैं । मध्य प्रदेश के निमाड़ क्षेत्र में महेश्वर कस्बे में माहेश्वर में महावीर मार्ग पर बनी गणपति की ये प्रतिमा गोबर और मिट्टी से बनी है जिसमें एक बड़ा हिस्सा गोबर का है ।

मिट्टी और गोबर की मूर्ति में पंचतत्वों का वास माना जाता है और ऐसा कहा जाता है कि खासकर गोबर में तो मां लक्ष्मी साक्षात वास करती हैं। मंदिर का बाहरी आकार किसी मस्जिद के गुंबद की तरह है वहीं मंदिर के अंदर की बनावट लक्ष्मी यंत्र की तरह है।

मंदिर में बाप्पा gobar ganesh mandir अपनी दोनों पत्नियों रिद्धि-सिद्धि संग देते हैं दर्शन और करते हैं भक्तों का कल्याण। यहां गणपति भक्तों की इच्छा पूरी कर देते हैं । यही वजह है कि भक्त यहां उल्टा स्वास्तिक बनाकर भगवान तक अपनी फरियाद पहुंचाते हैं मनोकामना पूरी होने के बाद यहां आ सीधा स्वास्तिक बनाना नहीं भूलते ।

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