सिख धर्म कथाएं

भयंकर ठण्ड में भी उबलता रहता है यहाँ गुरुद्वारा का पानी,इसका वास्तविक सच जानकर आपको भी यक़ीन नहीं होगा :o

कई बार लोग ईश्वर के अस्तित्व को मानने से इनकार करते हैं।

उनके अनुसार ईश्वर जैसी कोई चीज़ इस दुनिया में नहीं होती है। लेकिन समय-समय पर ऐसे चमत्कार होते रहते हैं, जिसे देखकर लोग बिना हैरान हुए नहीं रह पाते हैं। इन चमत्कारों को देखने के बाद लोग ईश्वर पर यक़ीन करने लगते हैं। हालाँकि इन चमत्कारों के पीछे ईश्वर का हाथ होता है या विज्ञान का, इसके बारे में कुछ कहा नहीं जा सकता है। कुछ जगहों पर ऐसे चमत्कारों के पीछे वैज्ञानिक कारण भी सामने आए हैं और कुछ जगहों पर विज्ञान भी हार गया है।

आज हम आपको एक ऐसी ही जगह के बारे में बताने जा रहे हैं,

जो अपने चमत्कार के लिए जाना जाता है। गर्मी का समय चल रहा है ऐसे में किसी हिल स्टेशन पर छुट्टियाँ बिताना किसी स्वर्गीय अनुभूति से काम नहीं होता है। भारत में कई हिल स्टेशन हैं, लेकिन मनाली सबसे ज़्यादा फ़ेमस है। मनाली में घूमने की कई जगहें हैं। इसके साथ ही यहाँ पर एक धार्मिक स्थल भी है, जहाँ का पानी भीषण ठंड में भी उबलता रहता है। यहाँ के लोगों का इस बारे में कहना है कि शेषनाग के ग़ुस्से की वजह से यहाँ का पानी उबलता रहता है।

आपको बता दें हम जिस जगह की बात कर रहे हैं,

उसका नाम मणि कर्ण है। हिमांचल में यह गुरुद्वारा काफ़ी फ़ेमस है। इस जगह के बारे में कहा जाता है कि भगवान शिव के क्रोध से बचने के लिए शेषनाग ने इस स्थान पर एक चमत्कारिक मणि फेंका था। उसके बाद उस दिन से लेकर आज तक यह जारी है। मणिकर्ण के बारे में कहा जाता है कि यहीं पर भगवान शिव और पता पार्वती ने साथ में लगभग ग्यारह हज़ार वर्षों तक तपस्या की थी। एक दिन माता पार्वती जलक्रीड़ा कर रही थीं, तभी उनके कानों में लगे आभूषण की एक मणि पानी में गिर गयी।

भगवान शिव के आदेश के बाद उनके शिष्यों ने उसे ढूँढने की बहुत कोशिश की,

लेकिन मणि किसी को नहीं मिली। इसके बाद शिव जी क्रोधित हो गए और अपनी तीसरी आँख खोल दी। उस नेत्र से एक शक्ति पैदा हुईं, जिनका नाम नैनादेवी पड़ा। नैनादेवी ने बताया कि माता पार्वती का मणि पाताललोक में शेषनाग के पास है। इसके बाद सभी देवता मिलकर शेषनाग के पास गए और मणि माँगने लगे। देवताओं के कहने पर शेषनाग ने उन्हें मणि वापस कर दी, लेकिन उन्हें यह बात बुरी लगी। उन्होंने उसी समय ज़ोर की एक फ़ूंकार भरी और इस जगह पर गर्म पानी की धार फूट पड़ी।

मणि मिलने के बाद शिवजी और माता पार्वती दोनो ख़ुश हो गए। तब से इस जगह का नाम मणिकर्ण पड़ गया। मणिकर्ण के गर्म पानी के कुंड के पीछे एक और कथा है। एक बार मणिकर्ण में गुरुनानक अपने पाँचों चेलों के साथ आए थे। एक दिन लंगर बनाने के लिए गुरुनानक ने अपने चेले मर्दाना को दाल और आटा माँग कर लाने के लिए भेजा। इसके बाद गुरुनानक ने मर्दाना को कहा कि वो जहाँ बैठे से वहीं से एक पत्थर उठाकर लाएँ। जैसे ही मर्दाना ने वहाँ से पत्थर उठाया, गर्म पानी की धारा बहने लगी। उस दिन से आज तक गर्म पानी की ये धार बह रही है। आज इस गर्म पानी का इस्तेमाल लंगर बनाने के लिए किया जाता है। श्रद्धालु इसी पानी को पीते भी हैं। ऐसा कहा जाता है कि जो भी इस पानी में डुबकी लगाता है, उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।

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