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नवरात्र पर जौ, इसका रंग देता है ये भविष्य के ये संकेत

भोपाल। नवरात्र में जौ लगाने का अत्यधिक महत्व है। कहा जाता है कि सृष्टि के आरंभ में सबसे पहले जौ की फसल ही लगाई गई थी। सृष्टि की रचना ब्रम्हा जी ने की थी, इसलिए उनके प्रतीक स्वरुप इन्हें लगाया जाता है। नवरात्र मां की भक्ति के लिए विशेष माने जाते हैं। मान्यता है कि जौ के फलने-फूलने से घर में सुख समृद्धि आती है। नवरात्र में जौ की केवल पूजा नही होती, बल्कि ये जीवन से जुड़ी अनेक बातों की ओर भी इशारा करती है भविष्य में होने वाली घटनाओं के बारे में संकेत करती हैं।

-यदि जौ बिना अंकुरित हुए सूख जाएं तो इसे शुभ नही माना जाता। इसे भविष्य में होने वाली किसी मुष्किल से भी जोड़कर देखा जाता है।

-जौ का नीचे का हिस्सा पीला और उपर का हरा होता है तो हिंदू नववर्ष आपके लिए खराब संदेश लेकर आ सकता है या अशुभ हो सकता है।

-नीेचे का हिस्सा सफेद और उपर का हरा हो तो इसे शुभ माना जाता है। यह संकेत करता है कि घर में किसी का तरक्की होने वाली है या कोई शुभ संदेश मिलने वाला है।

-यदि जौ का रंग नीचे से हरा और उपर से पीला है तो ऐसा माना जाता है कि साल का प्रारंभ तो अच्छा होगा लेकिन बाद में कुछ परेशानियां आ सकती हैं।

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