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जीवन को आसान बनाएंगी चाणक्य की बतायी गई ये नीति

Chanakya was an ancient Indian teacher, philosopher, economist, jurist and royal advisor, Kauṭilya or Vishnugupta

Chanakya was an ancient Indian teacher, philosopher, economist, jurist and royal advisor

Chanakya Niti In Hindi  आचार्य चाणक्य जिन्हें विष्णुगुुप्त या कौटिल्य के नाम से भी जाना जाता है। कहा जाता है कि उनके समान अब तक दूसरा कोई नही हुआ। इतिहास ही नही विद्वानों के बीच भी उनका बड़ा महत्व है। हर कोई आज भी उनकी बतायी बातों को ध्यान से पढ़ता है। उनका पालन करने का भी प्रयास करता है ताकि वह भी अपने जीवन में चंद्रगुप्त जितना सफल बन सके। उन्होंने जीवन में कुछ ऐसी बातें बतायी हैं जिनका पालन मनुष्य को करना चाहिए और दूसरों की बातों में ना आते हुए सदैव ही अपने ही जीवन के लक्ष्य की ओर बढ़ना चाहिए। Kauṭilya or Vishnugupta

-आचार्य कौटिल्य के अनुसार अगर कोई व्यक्ति किसी भी तरह की दवा भले ही वह आयुर्वेदिक औषधि ही क्यों ना हो का सेवन करता है तो उसे किसी और को नहीं बताना चाहिए। ऐसा करने से उसके स्वास्थ्य पर बहुत ही बुरा असर पड़ता है। Ethics of Chanakya

-उन्होंने यह भी बताया है कि किसी भी परिस्थिति में व्यक्ति को खुद के परिवार से या खुद के जीवन या व्यापार, नौकरी से जुड़े राज किसी अन्य व्यक्ति को नहीं बताने चाहिए। ऐसा करने पर दुश्मन कभी भी इसका लाभ उठा सकता है। फिर भले ही वह उसका मित्र ही क्यों ना हो। Chanakya Niti In Hindi

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-आचार्य कौटिल्य ने यह भी बताया है कि अगर संभोग के दौरान किसी तरह की कोई गलती हो जाए तो कभी इस तरह की बातें किसी दूसरे को नही बताना चाहिए। ऐसी बातें व्यक्ति के चरित्र पर कई तरह के सवाल खड़े कर देती हैं। Acharya Chanakya Kauṭilya or Vishnugupta

-अगर किसी बिगड़े हुए हालात की वजह से कभी किसी भी व्यक्ति को किसी कारण से खराब भोजन करना पड़ जाए तो उसे किसी और को कभी भी नहीं बताना चाहिए। ऐसा करने से उस व्यक्ति के मन में हीन भावना जन्म लेती है और वह उसे नीचा दिखाने लगता है। Chanakya Niti In Hindi

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-परिवार के एक सदस्य की बुराई किसी दूसरे सदस्य से करना कभी भी उचित नहीं बताया गया है। आपस में किसी भी तरह की शिकायत अगर है तो उसे अपने स्तर पर खुद ही निपटाने का प्रयास करना चाहिए। अन्यथा बेवजह परिवार का उपहास बनता है और उस परिवार की शांति भी भंग हो जाती है। Kauṭilya or Vishnugupta

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