ईसाई धर्म कथाएं

धर्मांतरण के बाद पछता रहे लाखों दलित परिवार, दिल दहलाने वाला भेदभाव करते हैं ईसाई

नई दिल्ली. देश के ग्रामीण और आदिवासी इलाकों के भोलेभाले दलितों को बहला फुसलाकर धर्मांतरण करवाने के मामले में एक चौंकाने वाली बात सामने आई हैं। दलित से ईसाई बनने के बाद कई लोग परेशान हैं। लाखों परिवारों ने अपनी समस्या लिखित रुप से संयुक्त राष्ट्र को की गई है। संयुक्त राष्ट्र ने एक संगठन की शिकायत पर भेदभाव के मामले में जांच की प्रक्रिया की है। बताया जाता है कि शिकायत वेटिकन के खिलाफ भी है।

सामाजिक भेदभाव से राहत देने के लिए लाखों परिवारों को ईसाई बनाया गया था, लेकिन अब यहीं सामाजिक भेदभाव किया जा रहा है। ऐसे में ईसाई मिशनरियों ने धोखा किया है। कई जगहों पर तो ऐसी भी बातें सामने आई जहां दलित से ईसाई बने परिवारों को चर्च में घुसने तक नहीं दिया गया। पूरे मामले में खास बात यह है कि ईसाई समुदाय की सबसे बड़ी संस्था वेटिकन द्वारा इस गंभीर मामले में कोई ठोस कदम तो क्या कुछ भी नहीं किया गया है।

दलित से ईसाई बने लाखों परिवारों को यहां आकर पता लगा कि दुनिया का सबसे बड़ा भेदभाव ईसाई समुदाय में हैं। यहां समुदाय के कुछ लोगों द्वारा भेदभाव करने के मामले को इस तरह दबाया गया कि लाखों परिवार धर्मांतरण के बाद पछता रहे हैं और अब वे कुछ निष्कर्ष पर नहीं पहुंच पा रहे कि इस मामले में क्या किया जाए। क्योंकि वे अब स्वयं को फंसा हुआ देख रहे हैं कि अब यहां से कैसे निकला जा सके।

isai dharm : christian peoples problems for cremation land

 

Millions of Dalit families

are repenting after adopting Christianity: The Christian missionary who is trying to convert the Dalits into a laughing-out party is doing a very bad job with them. A group of Dalits, who have become Christians, have written a letter to the United Nations and complained about discrimination. Their complaint is also against the Vatican.

 

पछताने से कुछ नहीं, घर वापसी ही समाधान

नराज होकर कई दलित परिवारों ने हिंदू धर्म तो छोड़ दिया लेकिन अब वे ईसाई बनकर बेहद परेशान है। दरअसल ईसाई बनने के बाद वहां काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। खास बात यह हैं कि कुछ दलितों के साथ दिलदहलादेना वाला भेदभाव के मामले सामने आए है। बात करें छत्तीसगढ़ और मध्यप्रदेश की तो यहां कुछ ईसाई बने दलित परिवारों के सदस्यों के साथ बहुत गंदे तरीके से भेदभाव किया जा रहा है। किसी परिवार के सदस्य बहुत बीमार हों तो भी कोई मदद नहीं की जाती है, वहीं कोई मरता भी हैं तो आर्थिक, सामाजिक सहित भावनात्मक अन्य तरीकों से किसी भी प्रकार मदद नहीं मिल रही।

दोगला है मीडिया

सूचना का सबसे बड़ा तंत्र आज भी मीडिया ही है। भलेही सोशल मीडिया ने बड़ी तरक्की कर ली लेकिन भरोसे की बात आती हैं तो वहां मीडिया पर ही भरोसा किया जाता है। मीडिया के कुछ हिस्सा आज के बाजारवाद के दौर में दोगलेपंथी की भूमिका में काम कर रहा है। जिसे करोड़ों लोगों को सही सूचना नहीं पहुंच पाती है। हमारे देश के मीडिया का ध्यान कभी भी गरीब दलितों की ओर नहीं आता है। गौर करें तो मीडिया को तो केवल भाजपा सरकार वाले राज्यों में ही दलितों की समस्याएं नजर आती हैं। यह हिंदू जातियों के विभाजन का षड़यंत्र भी हो सकता है। इस बारे में सभी को सोचना होगा। आज के हिंदूओं के यह बड़ी बात देखी जा रही है कि वे आज जातिवाद में बहुत अधिक विश्वास नहीं करते हैं। ऐसी बातें ईसाई बन गए दलितों ने ही हाल ही में बताई थी, जो मीडिया में कही नहीं दिखी।

 

 

However, the attention

of the media never goes to these converts dalits. They only see the problems of Dalits in the BJP ruled territories so that Hindus can be divided into castes. The Dalits who have become Christians have said that due to the rapid reforms in Hinduism, discrimination on the basis of caste-based has greatly reduced and now the new generation does not believe in Hindu youth racism.

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