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बेटी की आर्थिक स्थिति को आधार बनाकर पिता की संपत्ति में हिस्सा देने से इनकार नहीं किया जा सकता: तेलंगाना हाईकोर्ट

तेलंगाना हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए कहा है कि बेटी की आर्थिक स्थिति को आधार बनाकर उसे पिता की संपत्ति में हिस्सा देने से इनकार नहीं किया जा सकता। न्यायमूर्ति एमजी प्रियदर्शिनी ने जिला अदालत के फैसले के खिलाफ दायर अपील को खारिज करते हुए यह बात कही। जिला अदालत ने बेटी के पक्ष में फैसला सुनाते हुए माता-पिता की संपत्ति के विभाजन का आदेश दिया था।

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अपील में यह तर्क दिया गया था कि बेटी की आर्थिक स्थिति अच्छी होने के कारण उसे पिता की संपत्ति में कोई हिस्सा नहीं मिलना चाहिए, ऐसा कथित तौर पर एक वसीयतनामे के अनुसार होना चाहिए था।

 

अदालत ने इस दलील का भी जवाब दिया कि बेटी को पहले ही कृषि भूमि की बिक्री से लाभ मिल चुका है, इसलिए शादी के समय ही उसका हिस्सा दे दिया गया है। हालांकि, इस व्यवस्था के कोई सबूत न होने के कारण अदालत ने इस दावे को खारिज कर दिया। साथ ही, अदालत ने अघोषित विभाजन की धारणा को भी खारिज कर दिया, क्योंकि कार्यवाही में इस तरह के किसी समझौते का कोई उल्लेख नहीं था।

 

मां द्वारा कथित रूप से निष्पादित वसीयतनामे के बारे में अदालत ने पाया कि यह संदिग्ध है कि यह दस्तावेज 2010 में उनकी मृत्यु से एक साल पहले ही सामने आया है, खासकर बेटी की 1971 में हुई शादी के बाद से लंबे अंतराल को देखते हुए। पिछली कानूनी कार्यवाही में इस वसीयतनामे का कोई उल्लेख नहीं होने के कारण अदालत ने जिला न्यायाधीश के फैसले को बरकरार रखते हुए अपील खारिज कर दी।

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