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यहां जागृत है मां चामुंडा और तुलजा, इनके गुस्से से डर गए थे हनुमानजी

amazing story of maa chamunda devi tekri and maa tulja bhavani badi mata mandir dewas

देवास. देशभर में 52 शक्तिपीठ में से मां चामुंडा और तुलजा दरबार को विशेष शक्तिपीठ के रूप में माना जाता है। दरअसल आज भी मध्यप्रदेश के देवास में इन माताओं की दोनों मूर्तियां जागृत और स्वयंभू स्वरूप में हैं। माताओं के सामने मन से मांगी गई मन्नत हमेशा पूरी होती है।
यहां की एक धार्मिक कथा दूर-दूर तक जानी जाती है। देवी के रौद्र रुप को देख शिव के नतमस्तक होने की कथा कई जगहों पर सुनने को मिलती है। लेकिन देवी के गुस्से को देखकर हनुमानजी के डरने की सच्ची कहानी सिर्फ देवास की माताजी के यहां ही सुनाई देती है।


 

आज भी देवास टेकरी पर मान्यता है कि देवी मां के दोनों स्वरूप जागृत अवस्था में हैं। इन दोनों स्वरूपों को भक्त छोटी और बड़ी मां के नाम से पहचानते हैं। पुजारी नरेंद्र तिवारी ने बताया कि छोटी मां और बड़ी मां का बहन का रिश्ता है।

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एक बार दोनों बहनों में किसी बात को लेकर विवाद हो गया था, इसके बाद इस विवाद से क्षुब्द होकर दोनों माताओं ने अपना स्थान छोड़कर जाने लगी थी, तब बड़ी माता पाताल में समाई और छोटी माता अपने स्थान से उठकर खड़ी हो गई और टेकरी छोड़कर जाने लगी थीं।

chamunda devi dewas

पुजारी तिवारी के अनुसार दोनों माताओं को कुपित देखकर हनुमानजी माता का ध्वज लेकर आगे और भेरुबाबा मां का कवच बन देानों माताओं के पीछे-पीछे चलते हैं। भगवान हनुमानजी और भेरुबाबा ने भी उनसे क्रोध शांत कर रुकने की प्रार्थना की थी। इस वक्त तक बड़ी माताजी का आधा धड़ पाताल में समा गया था। बताया जाता है कि वे वैसी ही स्थिति में टेकरी में ठहर गई थीं। इधर छोटी मां टेकरी से नीचे उतर रही थीं। वे मांग अवरुद्ध होने के कारण और भी कुपित हो गई थीं। जिस अवस्था में नीचे उतर रही थी, वे उसी अवस्था में टेकरी पर रुक गई थीं, जो आज भी वैसी ही हैं।

 

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