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संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर के इन अनमोल वचनों पर अमल करने से बदल सकती है आपकी जिंदगी

भारत के संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती का अवसर है। dr br ambedkar quotes on democracy बाबा साहेब की जयंती के मौके पर पूरा देश उन्हें याद कर रहा है, लेकिन कोरोना वायरस के चलते देशव्यापी लॉकडाउन लगाया गया है, जिस वजह से भारतीय संविधान के रचियता, समाज सुधारक और महान नेता डॉ. भीमराव आंबेडकर की जयंती को धूमधाम से नहीं मनाया जा रहा है। लेकिन बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के लिए सम्मान हर भारतवासी के दिल में है। डॉ. भीमराव आंबेडकर को भारत में समानता दिवस और ज्ञान दिवस के रूप में मनाया जाता है। संविधान निर्माता डॉ. भीमराव आंबेडकर के इन अनमोल वचनों पर अमल करने से बदल सकती है आपकी जिंदगी…. 1.एक महान आदमी एक प्रतिष्ठित आदमी से इस तरह से अलग होता है कि वह समाज का नौकर बनने को तैयार रहता है। 2.लोग और उनके धर्म सामाजिक मानकों द्वारा सामाजिक नैतिकता के आधार पर परखे जाने चाहिए। अगर धर्म को लोगों के भले के लिए आवश्यक मान लिया जाएगा तो और किसी मानक का मतलब नहीं होगा।

3.बुद्धि का विकास मानव के अस्तित्व का अंतिम लक्ष्य होना चाहिए। 4. हर व्यक्ति जो मिल के सिद्धांत की एक देश दूसरे देश पर शासन नहीं कर सकता को दोहराता है उसे ये भी स्वीकार करना चाहिए कि एक वर्ग दूसरे वर्ग पर शासन नहीं कर सकता। 5.एक सफल क्रांति के लिए सिर्फ असंतोष का होना पर्याप्त नहीं है। जिसकी आवश्यकता है वो है, न्याय एवं राजनीतिक और सामाजिक अधिकारों में गहरी आस्था। 6. इतिहास बताता है कि जहां नैतिकता और अर्थशाश्त्र के बीच संघर्ष होता है वहां जीत हमेशा अर्थशास्त्र की होती है। निहित स्वार्थों को तब तक स्वेच्छा से नहीं छोड़ा गया है, जब तक कि मजबूर करने के लिए पर्याप्त बल ना लगाया गया हो। 7.मैं ऐसे धर्म को मानता हूं, जो स्वतंत्रता, समानता और भाई-चारा सीखाये।

8. मैं किसी समुदाय की प्रगति महिलाओं ने जो प्रगति हांसिल की है उससे मापता हूँ। 9. आज भारतीय दो अलग -अलग विचारधाराओं द्वारा शाशित हो रहे हैं । उनके राजनीतिक आदर्श जो संविधान के प्रस्तावना में इंगित हैं वो स्वतंत्रता , समानता , और भाई -चारे को स्थापित करते हैं । और उनके धर्म में समाहित सामाजिक आदर्श इससे इनकार करते हैं । 10.कानून और व्यवस्था राजनीतिक शरीर की दवा है और जब राजनीतिक शरीर बीमार पड़े तो दवा ज़रूर दी जानी चाहिए । 11.जीवन लम्बा होने की बजाये महान होना चाहिए । 12.मनुष्य नश्वर है । उसी तरह विचार भी नश्वर हैं । एक विचार को प्रचार -प्रसार की ज़रुरत होती है , जैसे कि एक पौधे को पानी की । नहीं तो दोनों मुरझा कर मर जाते हैं ।13.राजनीतिक अत्याचार सामाजिक अत्याचार की तुलना में कुछ भी नहीं है और एक सुधारक जो समाज को खारिज कर देता है वो सरकार को ख़ारिज कर देने वाले राजनीतिज्ञ से कहीं अधिक साहसी हैं । 14.जब तक आप सामाजिक स्वतंत्रता नहीं हांसिल कर लेते , क़ानून आपको जो भी स्वतंत्रता देता है वो आपके किसी काम की नहीं । 15.पति- पत्नी के बीच का सम्बन्ध घनिष्ट मित्रों के सम्बन्ध के सामान होना चाहिए । 16.यदि हम एक संयुक्त एकीकृत आधुनिक भारत चाहते हैं तो सभी धर्मों के शाश्त्रों की संप्रभुता का अंत होना चाहिए । 17.सागर में मिलकर अपनी पहचान खो देने वाली पानी की एक बूँद के विपरीत, इंसान जिस समाज में रहता है वहां अपनी पहचान नहीं खोता । इंसान का जीवन स्वतंत्र है। वो सिर्फ समाज के विकास के लिए नहीं पैदा हुआ है , बल्कि स्वयं के विकास के लिए पैदा हुआ है । 18.हम भारतीय हैं, पहले और अंत में।

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