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कोरोना के खत्म होने को लेकर Astrologer सुमिता सुमन की भविष्यवाणी

“जब – जब धरती पर अत्याचार अपने चरम पे होगा तो मैं उसका विनाश करने आऊंगा” ( शिव वाच ) धरती का हर कोना दुःख और पीड़ा से ग्रसित है, अत्याचार एवं भ्रष्टाचार अपने चरम पे है। विश्व मे ” कोरोना ” जैसी बीमारी का भय क्यों बढ़ा? किस गृह के प्रभाव के कारण “कोरोना” का विस्तार हुआ और इससे बचने के लिए हमें क्या उपाय करने चाहिए? महादेव जिन्होने संसार के विष को अपने गले मे उतार लिया यह विष ही आर्द्रा है, वहीं राहु भ्रम है, रहस्य है, विषाद (toxic) है, संक्रमण (virus) है।

ऐसा रोग, जिसे समझा न जा सके वो राहु है, वर्तमान में विश्व की स्थिति ऐसी क्यों हो रही है? क्या सचमुच मानव सभ्यता का पतन होने वाला है? क्या हमें जागरूक होने की आवश्यकता है? क्या हमें मानव सभ्यता को सही दिशा देने की आवश्यकता है? क्या वो समय आ गया है, जब हमें प्रकृति से जुड़कर रहने की आवश्यकता है? उत्तर है-“हां” हमे वो हर बदलाव लाने की आवश्यकता है, जिससे आने वाली पीड़ी स्वस्थ और सुरक्षित रह सके। क्या “महादेव” रूद्र स्वरुप मे इस सृष्टि का अंत कर देंगे, या अंत के कारक का अंत कर एक नया आरम्भ करेंगे। दोनों परिस्थितियों में जीत भी और हार भी मानव सभ्यता की ही होगी।

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विश्व में “कोरोना” जैसी बीमारी का भय क्यों बढ़ा? क्योंकि इस बीमारी का सीधा सम्बन्ध राहु से है। क्योंकि राहु भ्रम है , अनसुलझा रहस्य है , संक्रमण है और आर्द्रा नक्षत्रा भय है ,विध्वंश है। वर्त्तमान मे राहु आर्द्रा नक्षत्रा मे है और मिथुन राशि मे स्थित है। मिथुन राशि कुंडली के तीसरे भाव को दर्शाता है। तीसरा भाव गले और हाथों का कारक होता है। मिथुन राशि संचार (कम्युनिकेशन) का भी कारक होता है। इस संक्रमण का फैलाव हाथों के द्वारा ज्यादा हो रहा है, जिस कारण हाथों को बार-बार धोने की सलाह दी जा रही है।

 

 

इसका असर अप्रैल 2020 तक रहेगा। मई 2020 मे जब राहु मृगशिरा नक्षत्रा मे प्रवेश करेंगे तब इस सक्रमण का समाधान प्राप्त हो जायेगा लेकिन क्योंकि ये साल 2020 अंक ज्योतिष के हिसाब से राहु का साल है, इसीलिए पूरे साल सावधानी से रहने की आव्यशकता है। कहा जाता है कि हर बुराई को अच्छाई से जीती जा सकती है, उसी प्रकार अगर हम अपने जीवन मे हर अच्छी आदतों को शामिल कर लें तो इस संक्रमण से बचा जा सकता है। उपाय :- स्वच्छता को अपने जीवन का आधार बना लें। हर सुबह – शाम अपने घर मे कपूर, लौंग, धुप एवं गुगल जलाएं तो आपके घर का वातावरण शुद्ध रहेगा। कोई संक्रमण या किसी प्रकार की नकारात्मक शक्ति आपके घर में प्रवेश नहीं कर पायेगी। चांदी को सबसे शुद्ध पदार्थ माना गया है, चांदी के संपर्क में कोई संक्रमण नहीं टिक पाता, चांदी के पात्र मे जलग्रहण करने से वह जल अमृत के समान हो जाता है अर्थार्थ जल हमेशा चांदी के पात्र से ही ग्रहण करें। छोटे बच्चों को चांदी का कड़ा धारन कराएं। आंवला का सेवन करें। “ॐ नमः शिवाय” या “महामृतुंजय” मंत्र का रोज प्रातः 108 बार जप करें। महादेव से प्रार्थना है की हम सभी स्वस्थ एवं सुरक्षित रहें। … धन्यवाद… सुमिता सुमन 9523364306

 

कोरोनो आने की भविष्यवाणी का वीडियो

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