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नागपंचमी व्रत से पायें सर्पदोष से मुक्ति

importance of nag panchami puja vidhi

श्रावण मास की शुक्लपक्ष की पंचमी को नाग पंचमी के नाम से मनाया जाता है। इस दिन नागों का पूजन किया जाता है। सालों बाद ऐसा संयोग लग रहा है जब सावन के शनिवार के दिन नाग पचंमी का पर्व पड़ रहा है। क्योंकि शनिवार के दिन पित् मुक्ति हेतु पूजा फलित होती है क्योंकि शनि राहु से बने पितृदोष सबसे ज्यादा खराब फल देते है। अतः इस प्रकार बने दोष से मुक्ति हेतु सर्पश्राद्ध करना चाहिए। इसलिए शनिवार के बने इस पंचमी के लिए विशेष पूजा फल दायी साबित होगी। अतः जिन किसी जातक की कुंडली में शनि राहु ग्रह हों उन्हें आज के दिन सर्प मुक्ति श्राद्ध हेतु पूजा करनी चाहिए। जिसके कारण इस पर्व का फल दोगुना मिलेगा। संयोग के साथ-साथ इस दिन परिघ योग है। इस दिन व्रत करके सांपों को दूध पिलाया जाता है। गरूड़ पुराण में उल्लेख है कि इस दिन अपने घर के दोनों किनारों पर नाग की मूर्ति बनाकर पूजन करना चाहिए। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पंचमी तिथि का स्वामी नाग है। अर्थात् शेषनाग आदि सर्पराजाओं का पूजन पंचमी के दिन किया जाता है। श्रावण मास को शिव का मास माना जाता है साथ ही चूकि नाग शिवजी के आभूषण माने जाते हैं अतः इस दिन सर्प आदि की पूजा का विधान है। किसी जातक की कुंडली में सर्पदोष हो तो या कालसर्प दोष हो तो उसे इस दिन विधि विधान से सर्प पूजन कर दान आदि देने से जीवन में कालसर्प दोष से उत्पन्न बाधा दूर होती है। माना जाता है कि शिवजी द्वारा विषपान करने से उत्पन्न उनके शरीर के विष को दूर करने के लिए सर्प आदि देवताओं ने उनका विष अपने शरीर में धारण कर लिया था, जिसके उपरांत शिवजी ने उन्हें अपने गले में धारण किया। माना जाता है कि जिस दिन सभी सर्पो ने शिवजी की रक्षा की वह दिन पंचमी का दिन था, उसी दिन उन्हें सभी देवों ने वरदान दिया कि पंचमी को श्रावण मास के दिन उनकी विधिवत् पूजन की जावेगी। इस पूजन से सभी प्रकार के शारीरिक व्याधि से भी राहत मिलती है।

नाग पंचमी पूजन विधि importance of nag panchami puja vidhi

इस दिन अपने दरवाजे के दोनों ओर गोबर से सर्पों की आकृति बनानी चाहिए और धूप, पुष्प आदि से इसकी पूजा करनी चाहिए।
इसके बाद इन्द्राणी देवी की पूजा करनी चाहिए। दही, दूध, अक्षत, जलम पुष्प, नेवैद्य आदि से उनकी आराधना करनी चाहिए।
तत्पश्चात भक्तिभाव से ब्राह्मणों को भोजन कराने के बाद स्वयं भोजन करना चाहिए।
इस दिन पहले मीठा भोजन फिर अपनी रुचि अनुसार भोजन करना चाहिए।
इस दिन द्रव्य दान करने वाले पुरुष पर कुबेर जी की दयादृष्टि बनती है।
मान्यता है कि अगर किसी जातक के घर में किसी सदस्य की मृत्यु सांप के काटने से हुई हो तो उसे बारह महीने तक पंचमी का व्रत करना चाहिए। इस व्रत के फल से जातक के कुल में कभी भी सांप का भय नहीं होगा।

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