राशिफल

तैयार रहें! केतु का प्रकोप या कृपा? आप पर क्या होगा असर? पढ़ें पूरी खबर!

क्या आप जानते हैं ज्योतिष विज्ञान में राहु के साथ एक और छाया ग्रह “केतु” भी होता है? दक्षिण चंद्र-असंबंधी बिंदु के रूप में जाना जाने वाला केतु अलग होने, ध्यान, शांति, अंतर्ज्ञान और आध्यात्मिकता का प्रतीक है। मानो राहु सर्प का सिर है तो केतु उसकी पूंछ, दोनों मिलकर ब्रह्मांडीय ऊर्जा को प्रभावित करते हैं।

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ज्योतिष शास्त्र में केतु कई भूमिकाएँ निभाता है। सबसे पहले, यह हमें आत्मज्ञान की राह दिखाता है। केतु के प्रभाव से मनुष्य जीवन की क्षणभंगुरता को गहराई से समझ पाता है, आत्मनिरीक्षण की ओर प्रेरित होता है और सत्य की खोज में लग जाता है।

दूसरा, केतु हमें सांसारिक मोह से अलग होने की सीख देता है। यह वैराग्य का मार्ग प्रशस्त करता है, जिससे जीवन की अनित्यता का बोध होता है। साथ ही, केतु पूर्वजन्मों के कर्मों से बंधे अनुभवों और ज्ञान को उजागर करता है।

तीसरा, केतु अंतर्ज्ञान और अलौकिक शक्तियों को जगाता है। इससे हम गहरी जागरूकता की अवस्थाओं में प्रवेश कर पाते हैं और अनोखा ज्ञान प्राप्त कर सकते हैं। चौथा, केतु मोक्ष की प्राप्ति में हमारा मार्गदर्शन करता है। वह हमें जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति दिलाने की आकांक्षा जगाता है और आध्यात्मिक उन्नति की ओर ले जाता है।

ज्योतिष शास्त्र व्यक्तिगत समाधानों पर भी जोर देता है। केतु की ऊर्जा से लाभ उठाने के लिए ध्यान, आध्यात्मिक क्रियाएं, दान या केतु से जुड़े रत्नों का उपयोग किया जा सकता है। पर ये ध्यान रखें कि केतु का प्रभाव जन्मपत्री के आधार पर अलग-अलग होता है। इसलिए सटीक मार्गदर्शन के लिए किसी अनुभवी ज्योतिषी से परामर्श लेना जरूरी है।

तो क्या आप केतु की ऊर्जा का लाभ उठाकर आत्मज्ञान की राह पर चलने के लिए तैयार हैं?

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