happy Lohri 2021 खुशियां मनाने का पर्व है लोहड़ी

लोहड़ी खुशियों का त्योहार है। यह त्योहार भगवान सूर्य और अग्नि को समर्पित है। सूर्य और अग्नि को ऊर्जा का सबसे बड़ा स्रोत माना जाता है। यह त्योहार सर्दियों के जाने और बसंत ऋतु के आने का संकेत है। लोहड़ी की रात सबसे ठंडी मानी जाती है। पाल बालाजी ज्योतिष संस्थान जयपुर के निदेशक ज्योतिषाचार्य अनीष व्यास ने बताया कि इस त्योहार पर पवित्र अग्नि में फसलों का अंश अर्पित किया जाता है। माना जाता है कि ऐसा करने से फसल देवताओं तक पहुंचती है। लोहड़ी 13 जनवरी को मनाया जाएगा।

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पंजाबियों के लिए यह त्योहार काफी महत्व रखता है। इस त्योहार के दिन पंजाबी गीत और डांस का आनंद लिया जाता है। यह त्योहार मुख्यतः नई फसल की कटाई के मौके पर मनाया जाता है और रात को लोहड़ी जलाकर सभी रिश्तेदार और परिवार वाले पूजा करते हैं। लोहड़ी से कई लोक और पौराणिक कथाएं भी जुड़ी हुई हैं जिनके कारण यह त्यौहार मनाया जाता है। विश्वविख्यात भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि भंगड़े के साथ डांस और आग सेंकते हुए खुशियां मनाने का पर्व है लोहड़ी। पंजाब, हरियाणा और हिमाचल समेत पूरे देश में लोहड़ी की धूम है। इस त्योहार में मूंगफली, रेवड़ी, पॉपकॉर्न और मूंगफली खाने का व लोगों को प्रसाद में देने की विशेष परंपरा है। इससे पहले लोग शाम को सबसे पहले आग में रेवड़ी व मूंगफली डालते हैं। चूंकि लोहड़ी को किसानों का प्रमुख त्योहार माना जाता हे इस ऐसे में फसल मिलने के बाद मनाए जाने वाले पर्व में आग देवता को किसान प्रसन्न करने के लिए लोहड़ी जलाते हैं और उसकी परिक्रम करते हैं।

जलती लोहड़ी में गजक और रेवड़ी को अर्पित करना बहुत ही शुभ माना जाता है। लोहड़ी में भी होलिका दहन की तरह ही उपलों और लकड़ियों का छोटा ढेर बनाया जाता है। इसके आस पास परिवार के सभी सदस्य खड़े होते हैं और नाच गाकर खुशियां मनाते हैं। महिलाएं अपने छोटे बच्चों को गोद में लेकर लोहड़ी की आग को तपाती हैं। माना जाता है इससे बच्चा स्वस्थ रहता है और उसे बुरी नजर नहीं लगती।

विश्वविख्यात भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि हिन्दू पौराणिक शास्त्रों में अग्नि को देवताओं का मुख माना गया है। ऐसे लोहड़ी मनाने वाले किसान मानते हैं कि अग्नि में समर्पित किया गया अन्न का भाग देवताओं तक पहुंचता है। ऐसा करके लोग सूर्य देव व अग्निदेव के प्रति अपनी कृतज्ञता अर्पित करते हैं। पंजाब के लोगों का मानना है कि ऐसा करने से सभी का हक प्राप्त होता है साथ धरती माता अच्छी फसल देती हैं। किसी को अन्न की कमी नहीं होती। पंजाब में इस त्योहार को बहुत ही महत्वपूर्ण माना जाता है। खास की शादी के बाद जिसकी पहली लोहड़ी है उसे अपने घर में रहकर लोहड़ी मनाना और बुजुर्गों का आशीर्वाद लेना महत्वपूर्ण माना जाता है।

कौन था दुल्ला भट्टी why celebrate lohri festival in hindi

श्री सोमेश्वर महादेव मंदिर मालवीय नगर के पंडित मदन मोहन (भगवान सहाय) शर्मा ने बताया कि दुल्ला भट्टी मुग़ल शासक अकबर के समय में पंजाब में रहता था। उसे पंजाब के नायक की उपाधि से सम्मानित किया गया था क्योंकि पहले बड़े और अमीर व्यापारी लड़कियां खरीदते थे। तब इस वीर ने लड़कियों को छुड़वाया और उनकी शादी भी करवाई। इस तरह महिलाओं का सम्मान करने वाले वीर को लोहड़ी पर याद किया जाता है। दुल्ला भट्टी अत्याचारी अमीरों को लूटकर, निर्धनों में धन बाँट देता था। एक बार उसने एक गाँव की निर्धन कन्या का विवाह स्वयं अपनी बहन के रूप में करवाया था।

लोहड़ी क्यों मनाई जाती है why celebrate lohri festival in hindi

विश्वविख्यात भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि मान्यताओं के अनुसार लोहड़ी का त्योहार मुख्य रूप से सूर्य और अग्नि देव को समर्पित है। लोहड़ी की पवित्र अग्नि में नवीन फसलों को समर्पित करने का भी विधान है। इसके अलावा इस दिन लोहड़ी की अग्नि में तिल, रेवड़ियां, मूंगफली, गुड़ और गजक आदि भी समर्पित किया जाता है।ऐसा करने से यह माना जाता है कि देवताओं तक भी फसल का कुछ अंश पहुंचता है। साथ ही मान्यता ऐसी भी है कि अग्नि देव और सूर्य को फसल समर्पित करने से उनके प्रति श्रद्धापूर्वक आभार प्रकट होता है। ताकि उनकी कृपा से कृषि उन्नत और लहलहाता रहे।

लोहड़ी कैसे मानते हैं how to celebrate lohri 2021

श्री सोमेश्वर महादेव मंदिर मालवीय नगर के पंडित मदन मोहन (भगवान सहाय) शर्मा ने बताया कि लोहड़ी मनाने के लिए लकड़ियों की ढेरी पर सूखे उपले भी रखे जाते हैं। समूह के साथ लोहड़ी पूजन करने के बाद उसमें तिल, गुड़, रेवड़ी एवं मूंगफली का भोग लगाया जाता है। गोबर के उपलों की माला बनाकर मन्नत पूरी होने की खुशी में लोहड़ी के समय जलती हुई अग्नि में उन्हें भेंट किया जाता है। इसे ‘चर्खा चढ़ाना’ कहते हैं।

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पहली लोहड़ी का जश्न celebrate lohri 2021

श्री सोमेश्वर महादेव मंदिर मालवीय नगर के पंडित मदन मोहन (भगवान सहाय) शर्मा ने बताया कि ऐसा माना जाता है कि जिस घर में नई शादी हुई हो, शादी की पहली वर्षगांठ हो या संतान का जन्म हुआ हो, वहां तो लोहड़ी बड़े ही जोरदार तरीके से मनाई जाती है। लोहड़ी के दिन कुंवारी लड़कियां रंग-बिरंगे नए-नए कपड़े पहनकर घर-घर जाकर लोहड़ी मांगती हैं। माना जाता है कि पौष में सर्दी से बचने के लिए लोग आग जलाकर सुकून पाते हैं और लोहड़ी के गाने भी गाते हैं। इसमें बच्चे, बूढ़े सभी स्वर में स्वर और ताल में ताल मिलाकर नाचने लगते हैं। साथ ही ढोल की थाप के साथ गिद्दा और भांगड़ा भी किया जाता है।

पुरानी और नई मान्यताओं का संगम lohri festival celebration 2021

विश्वविख्यात भविष्यवक्ता और कुण्डली विश्ल़ेषक अनीष व्यास ने बताया कि पिछले कई सालों से लोहड़ी का त्योहार मना रहीं पवन बताती हैं कि इस पर्व का महत्व ही यही है कि बड़े बुजुर्गों के साथ उत्सव मनाते हुए नई पीढ़ी के बच्चे अपनी पुरानी मान्याताओं और रीती-रिवाजों का ज्ञान हासिल करते रहें, ताकि भविष्य में भी पीढ़ी-दर-पीढ़ी यह उत्सव ऐसे ही चलता रहे।

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