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चमत्कारी स्थानः युगों से यहां देवी दर्शन को आते हैं दो भक्त

satna maihar

सतना। नवरात्र के दौरान मंदिरों में भक्तों की भीड़ लगना आम बात है। लेकिन हम आपको जिस स्थान के बारे में बताने जा रहे हैं जहां दूर-दूर से भक्त आते हैं देवी से अपनी मुराद लेकर। यहां हम बात कर रहे हैं विंध्याचल पर्वत पर विराजीं मां शारदा की, जिन्हें मैहर मां maihar mata mandir के नाम से भी जाना जाता है।

यह स्थान शक्तिपीठ के रुप में दूर-दूर तक मशहूर है। कहा जाता है कि यहां आज भी माता के दो भक्त युगों से देवी दर्शनों के लिए आते हैं। यही वजह है कि आज भी यहां कोई सुबह 5 बजे से पहले नही आता। पुजारी भी रात्रि के वक्त मंदिर प्रांगण छोड़कर नीचे चले जाते हैं, जानकारों की मानें तो आल्हा-उदल नामक माता के दो भक्त यहां आज भी बरसाों से आते हैं और सबसे पहले देवी maihar mata mandir को फूल और जल अर्पित करते हैं। इसके बारे में ये भी मान्यता है कि यदि किसी ने भी इस घड़ी में आने का प्रयास किया या उन्हें देखने की कोशिश की तो उसकी मौत हो गई।

प्रसन्न होकर दिया था वरदान

कहा जाता है कि इन दो भक्तों ने ही माता maihar mata mandir की मूर्ति जंगल से लाकर यहां स्थापित की थी। उनकी निष्छल भक्ति से प्रसन्न होकर माता ने उन्हें अमरत्व का वरदान दिया, तब से अब तक यहां सबसे पहले आल्हा के देवी दर्शन और पूजा की परंपरा है। यहां के निवासियों के मुख से इस संबंध में बड़ी ही अनोखी कहानियां सुनने मिलती हैं जो कि अति रोचक और बेहद रोमांचित करने वाली भी होती हैं।


मैया का हार

इस स्थान का नाम मैहर है जिसका अर्थ है maihar mata mandir मैया का हार, दरअसल जब स्वयं को भस्मीभूत करने के बाद माता सती को जब भगवान षिव उठाकर तीनों लोकों के चक्कर लगा रहे थे तब माता सती का हार यहां पर गिरा था, जिसके बाद विंध्याचल पर्वत की इस चोटी को मैहर के नाम से जाना जाने लगा और यह पूरा क्षेत्र इसी नाम से प्रसिद्ध हो गया। देवी के दर्शन करने यहां देष से ही नहीं विदेषों से भी लोग आते हैं।

बढ़ती गई प्रसिद्धि

पहले यहां पूरा जंगल हुआ करता था, लेकिन देवी की बढ़ती प्रसिद्धि को देखते हुए यहां विकास कार्य किया गया और नीचे से चोटी पर विराजमान माता की मूर्ति तक भव्य मंदिर देखने मिलता है। आने-जाने की पर्याप्त सुविधाएं और साधन भी यहां मौजूद हैं। पर्वत के नीचे भरने वाला मेला भी अपनी अलग ही कहानी कहता है। maihar mata mandir

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