Padmini Ekadashi : भगवान विष्णु को अतिप्रिय है ये व्रत

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हिंदू पंचांग में जो माह अधिक हो जाता है पद्मनी एकादशी उस पर निर्भर करती है। माह पर निर्भर होने की वजह से इसे अधिक मास के नाम से भी जाना जाता है। इस वर्ष यह 28 सितंबर 2020 को है। कहा जाता है कि इस माह में भगवान विष्णु की विशेष कृपा होती है। पद्मनी एकादशी का उपवास करने के लिए चंद्र मास तय नही है। इस दिन भी भगवान विष्णु की पूजा करने का अत्यधिक महत्व है।

हर साल ही करीब 24 एकादशी padmini ekadashi vrat

हिंदू धर्म में एकादशी का व्रत महत्वपूर्ण स्थान है। हर साल ही करीब 24 एकादशी के व्रत आते हैं अर्थात हर माह में दो। अधिकमास या मलमास होने की स्थिति में इनकी संख्या बढ़कर 26 तक पहुंच जाती है। मल मास जिसे अधिक मास या पुरूषोत्तम मास भी कहा जाता है। इस मास में ही आती है परम पुण्यदायिनी और विष्णु प्रिय पद्मनी एकादशी।

अर्जुन ने भी जाना था व्रत का महत्व padmini ekadashi  ka Mahatva

कहा जाता है कि जो भी जातक यह व्रत धारण करता है वह विष्णु लोक को प्राप्त होता है इस व्रत का पुण्य उसे यज्ञों के समान ही प्राप्त होता है। ऐसी भी मान्यता है कि यह व्रत भगवान विष्णु को अत्यधिक प्रिय है। सर्वप्रथम भगवान श्रीकृष्ण ने इस व्रत का महत्व अर्जुन को सुनाया था जिससे अर्जुन को पुण्य की प्राप्ती हुई थी।

त्रेतायुग मे देवी अनुसुइया ने सुनायी थी कथा padmini ekadashi Vrat katha

त्रेतायुग के पराक्रमी राजा कार्तवीर्य की पत्नी को देवी अनुसुइया ने इस व्रत का महत्व एवं इसे धारण करने की विधि बतायी थी कहा जाता है कि इसके पश्चात ही भगवान विष्णु ने उन्हें पुत्र का वरदान दिया था जो कि अत्यंत ही पराक्रमी और रावण तक को बंदी बना लेने वाला था। कार्तवीर्य पुत्र का नाम भी अर्जुन ही बताया गया है।

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पूजा विधि Padmini Ekadashi Or Purushottam Ekadashi Vrat Katha 

-प्रातः जल्दी उठकर भगवान विष्णु की विधि-विधान से पूजा करें
-निर्जला व्रत दिनभर धारण करें और श्रीहरि का मन में जाप करते रहें।
-बुरे ख्याल मन में ना आने दें
-रात्रि जागरण कर प्रत्येक प्रहर भगवान विष्णु और शिव की पूजा कर उन्हें कोई ना कोई वस्तु अर्पित करें।
-द्वादशी के दिन फिर विधि-विधान से भगवान की पूजा करें।
-ब्राम्हणों को अपनी श्रद्धानुसार भोजन कराएं
-इसके पश्चात स्वयं व्रत पूर्ण कर उपवास खोलें।

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