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माता के श्राद्ध के लिए पुण्यदायी मानी गयी है ये तिथि

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Pitra Dosh Upay Vidhan and puja vidhi

Shraddha Paksha अश्वनी मास कृष्ण पक्ष के 15 दिन पित्र पक्ष के नाम से विख्यात हैं। इन 15 दिनों में लोग अपने पितरों को जल देते हैं तथा उनकी मृत्यु तिथि पर श्राद्ध करते हैं। शास्त्रों में मनुष्य के लिए इसे उतारने के 3 ऋण बताए बताए गए हैं। इनमें श्राद्ध द्वारा इनका उतारना आवश्यक है। क्योंकि जिन माता पिता ने हमारी आयु आरोग्य और सुख सौभाग्य वृद्धि के लिए प्रयास किए उन्हें प्रसन्न करना और ऋण मुक्त होना भी हमारा ही दायित्व है। इसलिए यह कर्म पितृ की पुण्यतिथि  पर अवश्य ही करना चाहिए।

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अमावस्या पितरों के लिए परम फलदायी Amavasya 2020

Pitra Paksha 2020, शब्द का अर्थ है श्रद्धा से जो कुछ किया जाए। पितृपक्ष में श्राद्ध करने से पुत्र में वर्ष भर प्रसन्न रहते हैं। देवताओं तथा ऋषियों को जल देने के अनंतर पितरों को जल देकर तृप्त किया जाता है। यदि प्रत्येक अमावस्या पितृ की पुण्यतिथि है। तथापि अश्वनी की अमावस्या पितरों के लिए परम फलदायी है।

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नवमी को माता के श्राद्ध के लिए पुण्यदायी Navami Tithi

इस प्रकार पितृ पक्ष की नवमी को माता के श्राद्ध के लिए पुण्यदायी माना गया है। इस श्राद्ध कर्म के लिए सबसे पवित्र स्थान गया तीर्थ है। पितरों को तर्पण करने पर व्यक्ति दीर्घायु लक्ष्मी यश सुख साधन एवं धन्य धन्य आदि की प्राप्ति करता है और उन्हें स्वर्ग तथा मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस प्रकार पितरों को तर्पण सदैव ही व्यक्ति के सुख मय बताया गया है।

अतृप्त ही रहती है आत्मा Pitra Paksha Pujan Vidhi

माता का तर्पण करने पर भी मनुष्य को पुण्य फल की प्राप्ती होती है। माता का आशीर्वाद देवों के आशीर्वाद के समान ही बताया गया है। कहा जाता है कि यदि माता की आत्मा को दुखी किया जाए तो मनुष्य को तीनों लोकों में कहीं शांति नही मिलती। वह जीवन पर्यंत यहां से वहां भटकता रहता है और मृत्यु उपरांत भी उसकी आत्मा अतृप्त ही रहती है।

बताते हैं उर्पयुक्त विधान Pitra Dosh Upay

इसके लिए भी गया या जिस भी स्थान पर आप यह कर्म करने जा रहे हैं वहां के मौजूद पंडा उर्पयुक्त विधान बताते हैं जिसके अनुसार श्राद्ध कर्म करने से आपको माता का भी आशीर्वाद प्राप्त होता है। और वे निश्चित धाम और शांति को प्राप्त करती है। Pujan and vidhi

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