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dwitiya shradh 2020 द्वितीया श्राद्ध से पाएं संतान के कष्टों से निवृत्ति

पंडित पीएस त्रिपाठी आज का पंचांग dwitiya shradh 2020  Pitru Paksha 2020 Dates 

दिनांक 03.09.2020 शुभ संवत 2077 शक 1942 सूर्य दक्षिणायन का प्रथम (शुद्व) आश्विन मास कृष्ण पक्ष प्रतिपदा तिथि …दोपहर को 12 बजकर 27 मिनट तक … दिन … गुरूवार … पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र … रात्रि को 08 बजकर 51 मिनट तक … आज चंद्रमा … कुंभ राशि में … आज का राहुकाल दोपहर को 01 बजकर 36 मिनट से 03 बजकर 09 मिनट तक होगा …

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भाद्रपद पूर्णिमा से आश्विन कृष्णपक्ष अमावस्या तक के सोलह दिनों को पितृपक्ष कहते हैं। जिस तिथि को देहांत होता है, उसी तिथी को पितृपक्ष में उनका श्राद्ध किया जाता है। शास्त्रों के अनुसार पितृपक्ष में अपने पितरों के निमित्त जो अपनी शक्ति सामर्थ्य के अनुरूप शास्त्र विधि से श्रद्धापूर्वक श्राद्ध करता है, उसके सकल मनोरथ सिद्ध होते हैं और घर-परिवार, व्यवसाय तथा आजीविका में हमेशा उन्नति होती है। dwitiya shradh 2020 पितृ दोष के अनेक कारण होते हैं, जिसमें परिवार में किसी की अकाल मृत्यु होने से, मरने के बाद माता-पिता का उचित ढंग से क्रियाकर्म और श्राद्ध नहीं करने से, उनके निमित्त वार्षिक श्राद्ध आदि न करने से पितरों को दोष लगता है। इसके फलस्वरूप परिवार में अशांति, वंश-वृद्धि में रूकावट, आकस्मिक बीमारी, संकट, धन में बरकत न होना, सारी सुख सुविधाएँ होते भी मन असन्तुष्ट रहना आदि पितृ दोष हो सकते हैं। यदि परिवार के किसी सदस्य की अकाल मृत्यु हुई हो तो पितृ दोष के निवारण के लिए शास्त्रीय विधि के अनुसार उसकी आत्म शांति के लिए किसी पवित्र तीर्थ स्थान पर श्राद्ध करवाएँ। प्रतिवर्ष पितृपक्ष में अपने पूर्वजों का श्राद्ध, तर्पण अवश्य करें। द्वितीया श्राद्ध में जिस भी व्यक्ति की मृत्यु द्वितीय तिथि (शुक्ल पक्ष कृष्ण पक्ष) के दिन होती हैं उनका श्राद्ध इसी दिन किया जाता है। इस दिन पूजन करने व पितरों का आशीर्वाद लेने से संतानप्राप्ति की कामना पूरी होती है वहीं रेवती नक्षत्र आने से पितरों का आशीर्वाद व्यवसाय में शुभफलदायक है। इस दिन उनका श्राद्ध करने का विवरण पुराणों में मिलता है। dwitiya shradh 2020  Pitru Paksha 2020 Dates

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पितृ श्राद्ध पक्ष पूजा विधि सामग्री: Pitru Paksha 2020 Dates dwitiya shradh 2020

कुशा, कुशा का आसन, काली तिल, गंगा जल, जनैउ, ताम्बे का बर्तन, जौ, सुपारी, कच्चा दूध-सबसे पहले स्वयं को पवित्र करते हैं जिसके लिए खुद पर गंगा जल छिड़कते हैं उसके उपरांत कुशा को अनामिका (रिंग फिंगर) में बाँधते हैं। जनेऊ धारण करे, ताम्बे के पात्र में फूल, कच्चा दूध, जल ले अपना आसान पूर्व पश्चिम में रखे व कुशा का मुख पूर्व दिशा में रखे हाथों में चावल एवं सुपारी लेकर भगवान का मनन करे उनका आव्हान करें। dwitiya shradh 2020 दक्षिण दिशा में मुख कर पितरो का आव्हान करें, इसके लिए हाथ में काली तिल रखे। अपने गोत्र का उच्चारण करें साथ ही जिसके लिए श्राद्ध विधि कर रहे हैं उनके गोत्र एवम नाम का उच्चारण करें और तीन बार तर्पण विधि पूरी करें अगर नाम ज्ञात न हो तो भगवान का नाम लेकर तर्पण विधि करें। तर्पण के बाद धूप डालने के लिए कंडा ले, उसमें गुड़ एवम घी डाले। बनाये गए भोजन का एक भाग धूप में दे उसके आलावा एक भाग गाय, कुत्ते, कौए, पीपल एवं देवताओं के लिए निकाले। इस प्रकार भोजन की आहुति के साथ विधि पूरी की जाती है। dwitiya shradh 2020

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