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अधिक मास में भूलकर भी ना करें यह कार्य, हो सकता है आपका नुकसान, जानिए अधिक मास का महत्व

purushottam maas adhik maas in hindi

हिन्दू धर्म में अधिक मास का बहुत ही महत्व है। अधिक मास को मलमास भी कहा जाता है। इसे पुरूषोत्तम भगवान विष्णु का मास भी कहा गया है। इस बार अधिक मास का विशेष संयोग बन रहा है। 160 वर्ष बाद यह विशेष संयोग बन रहा है। पंचाग के अनुसार आश्विन मास के श्राद्ध पक्ष 17 सितंबर को समाप्त हो गया है और अधिक मास 18 सितंबर से शुरू हो गया है, जिसका समापन 16 अक्टूबर 2020 को होगा। अधिक मास में धार्मिक कार्य करने से विशेष पुण्य प्राप्त होता है। अधिक मास को मलमास या पुरूषोत्तम भी कहा जाता है। आज हम आपको अधिक मास का महत्व एवं अधिक मास के किन कार्यो को भूलकर भी नही करना चाहिए। उनके बारे में आपको बताने जा रहें। purushottam maas adhik maas in hindi

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अधिक मास का महत्व purushottam maas adhik maas in hindi

हिन्दू धर्म में अधिक मास या मलमास का बहुत ही महत्व है। पौराणिक कथाओं के अनुसार एक समय अधिक मास को लोग मलमास कहने लगे थे। जिससे वे नाराज होकर अपनी इस पीड़ा को लेकर भगवान विष्णु के पास चले गए एवं कहने लगे की अधिक मास का कोई स्वामी नही है इसलिए मलमास कहा जाता है। अधिक मास की इस पीड़ा को सुनकर भगवान विष्णु ने अधिक मास को अपना ना दिया। जिसके बाद से अधिक मास को पुरूषोत्तम मास कहा जाने लगा। भगवान विष्णु का एक नाम पुरूषोत्तम भी है। कहा जाता है कि अधिक मास को वरदान देते हुए भगवान विष्णु ने कहा था कि अधिक मास में जो भी व्यक्ति मेरी पूजा, उपासना आदी करेगा। उससे वे प्रसन्न होकर अपना आशीर्वाद प्रदान करेंगे और हर प्रकार की मनोकानाओं को पूर्ण करेंगे। इसलिए अधिक मास में भगवान विष्णु की पूजा का विशेष महत्व माना गया है। कहा जाता है कि अधिक मास में पवित्र नदी में स्नान करना, पूजन करना, अनुष्ठान करना और दान देने से विशेष फल प्राप्त होते है और हर प्रकार की मनोकामनाएं भी पूर्ण होती है।

अधिक मास में भूलकर भी ना करें यह कार्य purushottam maas adhik maas in hindi

अधिक मास में कुछ सावधानियां भी रखनी पड़ती है। कुछ कार्यो को अधिक मास में भूलकर भी नही करना चाहीए। 160 वर्ष बाद इस बार अधिक मास आया है। इसके बाद वर्ष 2039 में भी अधिक मास का विशेष संयोग बनेगा। इसी संयोग के चलते ही लीप ईयर और आश्विन अधिक मास एक साथ पड़ रहें है। अधिक मास में कुछ कार्य करना अशुभ माना गया है। वर्षो से ही ऐसी मान्यता चली आ रही है कि अधिक मास में नई चीज की ख़रीददारी कर घर नही लाना चाहिए। अधिक मास में किसी भी नई वस्तु की खरीदी को अशुभ माना गया है। साथ ही अधिक मास में कोई भी शुभ कार्य नही किया जाता है। अधिक मास में वस्त्र, आभूषण, घर, दुकान, वाहन, जमीन आदी की ख़रीददारी नही होती है। अगर आप ऐसा करते है तो आपको इसमें आपकी नुकसानी होगी। साथ ही अधिक मास में शादी विवाह भी नही किया जाता है। किसी प्रकार के मांगलिक कार्यो को करना अधिक मास में निषेध है। इसलिए आप अधिक मास में इस प्रकार का कोई कार्य ना करे। बल्कि पुरे मन से भगवान विष्णु की पूजा कर उन्हें प्रसन्न करें और उनका आशीर्वाद प्राप्त करें।

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