धर्म कथाएं

राहु – आकाशीय क्षेत्र के रहस्यों को उजागर करना: दानव से दिव्य तक!!

भारतीय ज्योतिष की जटिल जाल में, राहु एक विरोधाभासी शक्ति के रूप में उभर कर आता है, जो पौराणिक कथाओं की गहराइयों से जन्मा है। पारंपरिक ग्रहों के विपरीत, राहु कोई भौतिक पिंड नहीं है, बल्कि एक वैचारिक बिंदु है जहां पृथ्वी और चंद्रमा की कक्षाएं एक-दूसरे को काटती हैं, जिसे चंद्र कला נקודה (Nakoda – Point) के रूप में जाना जाता है।

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कथा के अनुसार, राहु, एक राक्षस, समुद्र मंथन के दौरान चतुराई से अमृत का सेवन कर लेता है, लेकिन भगवान विष्णु द्वारा उसका सिर कलम कर दिया जाता है। इस दिव्य सिर कलम करने के परिणामस्वरूप राहु का अस्तित्व अनोखा हो गया, जो शुभ और अशुभ दोनों तरह के प्रभावों से युक्त है।

ज्योतिष में, राहु धोखाधड़ी, महत्वाकांक्षा और भाग्य के अप्रत्याशित मोड़ों का प्रतीक है। यह चालाकी, अप्रत्याशितता और सांसारिक इच्छाओं जैसे लक्षणों से जुड़ा हुआ है। कुंडली में राहु की स्थिति अन्य खगोलीय पिंडों के साथ उसके संरेखण के आधार पर चुनौतियों, अप्रत्याशित लाभों या दोनों के मिश्रण का संकेत कर सकती है। अपने क्रूर स्वभाव के बावजूद, राहु सफलता, शक्ति और परिवर्तनकारी अनुभव भी प्रदान करता है, जो व्यक्तियों को मानवीय अस्तित्व की भूलभुलैया से निकालने में मदद करता है।

संक्षेप में, राहु मानवीय क्षमता के दोहरे स्वभाव का प्रतीक है, जो आत्म-साक्षात्कार के मार्ग पर बाधाओं और अवसरों दोनों की पेशकश करता है। इसका प्रभाव हमें जीवन की जटिलताओं और भाग्य के ब्रह्मांडीय नृत्य में प्रकाश और छाया के निरंतर परस्पर क्रिया की याद दिलाता है।

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