धर्म कथाएं

Real Facts About mahabharata आखिर क्यों भगवान कृष्ण ने की थी सत्यभामा से शादी

कहा जाता है कि सत्यभामा को अपने रूप का बहुत अभिमान था, वहीं उसे देवमाता अदिति से चिरयौवन का वरदान भी मिला था. Real Facts About mahabharata

Real Facts About mahabharata भगवान श्रीकृष्ण की 8 पत्नियां थी रूक्मणि और जामंवती से विवाह के बाद भगवान कृष्ण ने सत्यभामा को अपनी तीसरी पत्नी के रूप में स्वीकार किया था. कहते हैं सत्यभामा के पिता सत्राजीत के पास स्यामंतक मणि थी जिसकी चोरी का आरोप भगवान कृष्ण के ऊपर लगा था. भगवान कृष्ण ने वो मणि जामवंत को युद्ध में हरा के प्राप्त की थी और उसे सत्राजीत को वापस किया था. जब श्री कृष्ण ने सत्राजीत को मणि वापस की तो उन्हें अपनी गलती पर बहुत दुख हुआ कि उन्होने भगवान कृष्ण पर चोरी का आरोप लगाया था. जिसके लिए सत्राजीत ने भगवान कृष्ण से क्षमा मांगी और अपनी गलती का प्रायश्चित करने के लिए भगवान से अपनी पुत्री सत्यभामा से विवाह करने की प्रार्थना की. (Real Facts About mahabharata) सत्राजीत ने भगवान को स्यामंतक मणि दहेज में उपहार स्वरूप प्रदान की. इस तरह सत्यभामा भगवान कृष्ण की तीन महारानियों में से एक रानी बनी. कहा जाता है कि सत्यभामा को अपने रूप का बहुत अभिमान था, वहीं उसे देवमाता अदिति से चिरयौवन का वरदान भी मिला था. सत्यभामा खुद को श्रेष्ठ समझती थी उसे अभिमान था कि वो राज घराने से है. उसका एक पुत्र था जिसका नाम भानु था.

कहते हैं नरकासुर के वध के बाद एक बार भगवान कृष्ण स्वर्ग की सैर पर गए थे वापस आते समय इंद्र ने भगवान कृष्ण को पारिजात पुष्प भेंट किया. जब श्रीकृष्ण वापस महल आए तो उन्होंने वो फूल अपनी प्रिय रानी रुकमणि को दे दिया. (Real Facts About mahabharata) ये बात नारदजी ने सत्यभामा को बता दी जिसके बाद सत्यभामा भगवान कृष्ण से नाराज हो गईं और पारिजात के वृक्ष को पृथ्वी पर लाने की जिद करने लगी. कहते हैं सत्यभामा की जिद को पूरा करने के लिए भगवान कृष्ण स्वयं स्वर्ग से पारिजात का वृक्ष लेकर आए थे, पारिजात को स्वर्ग का वृक्ष होने का गौरव प्राप्त है, इसे घर में लगाने से व्यक्ति को सुख-सम्पदा की प्राप्ति होती है.

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कौन था सत्यभामा Real Facts About mahabharata

एक बार सत्यभामा ने भगवान कृष्ण से पूछा कि मैंने ऐसे कौन से काम किए थे जिसकी वजह से आपको मैंने पति के रूप में प्राप्त किया है. पारिजात का कल्पवृक्ष मेरे आंगन की शोभा बढ़ा रहा है जिसके बारे में लोग जानते तक नहीं हैं. सत्यभामा के इस सवाल का जवाब देने के लिए भगवान कृष्ण उन्हें कल्पवृक्ष के नीचे ले गए और सत्यभामा को उनके पूर्व जन्म की कथा सुनाई. Real Facts About mahabharata

भगवान कृष्ण ने सत्यभामा को बताया कि अपने पूर्व जन्म में वो सुधर्मा नाम के ब्राह्मण की पुत्री थी जिसका नाम गुणवती था, सुधर्मा ने अपने एक शिष्य चंद्र से अपनी बेटी का विवाह किया था. एक बार ससुर और दामाद दोनो जंगल से गुजर रहे थे, इस दौरान एक राक्षस ने दोनों का वध कर दिया था. जब इस बात की जानकारी गुणवती को हुई तो उसे बहुत दुख हुआ और उसने इस बात का बहुत शोक किया. गरीबी के कारण अपने घर का सारा समान बेचकर पिता और पति का अंतिम संस्कार किया. पति की मृत्यु के बाद गुणवती ने अपना सारा जीवन भगवान विष्णु को समर्पित कर दिया और भगवान विष्णु की सेवा में ही दिन-रात लीन रहने लगी.

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इसी दौरान कार्तिक मास पर गुणवती ने नियमपूर्वक व्रत आरंभ कर पूजन किया, व्रत के दौरान एक बार गुणवती को बहुत तेज बुखार हो गया लेकिन इस दौरान भी उसने न तो अपना व्रत तोड़ा और न ही भगवान की पूजा बंद की. वो बीमार रहने के बावजूद रोजाना नियमपूर्वक पूजा-पाठ कर रही थी लेकिन उपवास के कारण शरीर ने साथ छोड़ दिया और गंगा में स्नान करते समय उसकी मृत्यु हो गई. भगवान ने सत्यभामा से कहा कि इसी पुण्य के कारण उसने भगवान कृष्ण को पति के रूप में पाया है और कृष्ण की पटरानी बनने का सौभाग्य पाया है.

भगवान कृष्ण और सत्यभामा की संतानों के नाम Real Facts About mahabharata

भानु, सुभानु, स्वरभानु, प्रभानु, भानुमान, चंद्रभानु, वृहद्भानु, अतिभानु, श्रीभानु और प्रतिभानु.

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