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अयोध्या के बारे में आप नहीं जानते होंगे ये बातें, इसे कहा जाता था धरती का स्वर्ग

अयोध्या भगवान विष्णु के चक्र पर बसी होने की मान्यता, पुराणों और वाल्मीकि रामायण के मुताबिक इस नगरी को दी जाती थी इंद्रलोक की संज्ञा, कहा जाता है कि अष्ट कमल के आकार की थी यह सुदंर अयोध्या नगरी

 Facts About Shri Ram Janmabhoomi Ayodhyaश्री रामलला की जन्मभूमि पर उनके मंदिर के निर्माण और प्राण प्रतिष्ठा के लिए अयोध्या पूरी तरह तैयार हो चुकी है। सज-संवर कर तैयार हुई अयोध्या फिर से उसी त्रेता कालीन वैभव में पहुंच गई है जैसी भगवान श्री राम और सूर्यवंशी राज काल के समय थी। बताया जाता है कि त्रेता काल में अयोध्या बेहद सुंदर नगरी थी। आइए बताते हैं भगवान श्री राम की जन्म भूमि के बारे में कुछ खास बातें। Facts About Shri Ram Janmabhoomi Ayodhya

अष्ट कमल के आकार की नगरी

बताया जाता है कि पौराणिक काल में अयोध्या अष्टकमल के आकार बताई जाती थी। अयोध्या नाम का अर्थ है ‘जिसे कभी जीता न जा सके” या जिसके साथ युद्ध करना असंभव हो। मान्यता है कि यह नगरी जगत के पालन कर्ता भगवान श्री हरि विष्णु के चक्र पर बसी हुई है। यह मंदिरों की नगरी है और यहां आज भी भगवान रहते हैं। Facts About Shri Ram Janmabhoomi Ayodhya यही कारण है कि अयोध्या को पवित्र नगरी कहा जाता है और मान्यता है कि अयोध्या नाम का अर्थ वह नगर जहां भगवान जन्म लेते हैं।

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श्रीराम के पूर्वज मनु ने बसाई थी अयोध्या

अथर्ववेद और वाल्मीकि रचित रामायण के बालकांड में की गई व्याख्या के अनुसार अयोध्या नगरी को भगवान श्री राम के पूर्वज विवस्वान (सूर्य) पुत्र वैवस्वत मनु द्वारा बसाया गया था। हिंदू मान्यताओं के अनुसार अयोध्या के दशरथ महल में ही श्रीराम का जन्म हुआ। राजा दशरथ के शासन काल और राम राज्य के समय अयोध्या सुखमय, खुशहाल और खिलखिलाती नगरी थी। Facts About Shri Ram Janmabhoomi Ayodhya 

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दी जाती थी इंद्रलोक की संज्ञा

अयोध्या की अतुलनीय आभा, अलौकिक छटा, अद्भुत आकर्षण और मनमोहक सुंदरता का वर्णन वाल्मीकि रामायण में किया गया है। यह नगरी इतनी सुंदर थी कि इसे धरती का स्वर्ग, स्वर्णिम नगर और इंद्रलोक की संज्ञा दी जाती थी। Facts About Shri Ram Janmabhoomi Ayodhya

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अयोध्या बताई गई है विशालकाय नगरी Facts About Shri Ram Janmabhoomi Ayodhya

प्राचीन उल्लेखों के अनुसार 96 वर्ग मील के लगभग बताया गया था। वाल्मीकि रामायण के बालकांड में इसका उल्लेख किया गया है। माना जाता है कि अयोध्या 12 योजन लंबी और 3 योजन चौड़ी बताई गई थी। रामायण के पांचवे सर्ग में भी अयोध्या के आकार का वर्णन किया गया ंहै। इसके अलावा अलग-अलग ग्रंथों और उनके अलग-अलग हिस्सों में अयोध्या का अलग-अलग तरीके से वर्णन किया गया है।

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