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रुद्राक्ष धारण विधि एवं महिमा भाग 2 – कपिल शर्मा (काशी) से जानें

एक मुख वाला रुद्राक्ष साक्षात शिव का स्वरूप है।वह भोग और मोक्ष रूपी फल प्रदान करता है। उसके दर्शन मात्र से ही ब्रह्म हत्या का पाप नष्ट हो जाता है।

गतांक से आगे
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रुद्राक्ष धारण विधि एवं महिमा भाग 2
भगवान शंकरजी मां पार्वतीजी से कहते हैं–
1️⃣एक मुख वाला रुद्राक्ष साक्षात शिव का स्वरूप है।वह भोग और मोक्ष रूपी फल प्रदान करता है। उसके दर्शन मात्र से ही ब्रह्म हत्या का पाप नष्ट हो जाता है।
2️⃣दो मुख वाला रुद्राक्ष देवदेवेश्वर कहा गया है।वह संपूर्ण कामनाओं और फलों को देने वाला है वह विशेष रूप से गौ हत्या का पाप नष्ट करता है।
3️⃣तीन मुख वाला रुद्राक्ष सदा साक्षात साधन का फल देने वाला है।उसके प्रभाव से सारी विद्याए प्रतिष्ठित हो जाती है।
4️⃣चार मुख वाला रुद्राक्ष साक्षात ब्रह्मा का स्वरूप है।और ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्ति देने वाला है। उसके दर्शन और स्पर्श से शीघ्र ही धर्म- अर्थ- काम और मोक्ष इन चारों पुरुषार्थों की प्राप्ति होती है।
5️⃣पांच मुख वाला रुद्राक्ष साक्षात का कलाग्निरूद्र रूप है। वह सब कुछ करने में समर्थ है। सब को मुक्ति देने वाला तथा संपूर्ण मनोवांछित फल प्रदान करने वाला है। वह पंचमुखी रुद्राक्ष अगम्या स्त्री के साथ गमन और पापान्न् भक्षण से उत्पन्न समस्त पापों को दूर कर देता है।
6️⃣छः मुख वाले रुद्राक्ष कार्तिकेय का स्वरुप है। यदि दाहिनी बांह में ईसे धारण किया जाए तो धारण करने वाला मनुष्य ब्रह्महत्या आदि पापों से मुक्त हो जाता है इसमें संशय नहीं है।
7️⃣सात मुख वाला रुद्राक्ष अनंग नाम से प्रसिद्ध है।उसको धारण करने से दरिद्र ऐश्वर्यशाली हो जाते हैं।
8️⃣आठ मुख वाला रुद्राक्ष अष्टमूर्ति भैरव रूप है।उसको धारण करने से मनुष्य पूर्ण आयु होता है और मृत्यु के पश्चात शूल धारी शंकर हो जाता है।
9️⃣नौ मुख वाला रुद्राक्ष की अधिष्ठात्री नौ रूप धारण करने वाली महेश्वरी दुर्गा देवी मानी गई है। एवं भैरव व कपिल मुनि का प्रतीक भी माने गए हैं। जो मनुष्य भक्ति परायण होकर अपने बाएं हाथ में नौ मुखी रुद्राक्ष धारण करता है वह निश्चय ही मेरे समान सर्वेश्वर हो जाता है इसमें कोई संशय नहीं है।
1️⃣0️⃣दस मुख वाला रुद्राक्ष साक्षात भगवान विष्णु का रूप है। उसको धारण करने से मनुष्य की संपूर्ण कामनाएं पूर्ण हो जाती है।
1️⃣1️⃣ग्यारह मुख वाला रुद्राक्ष रूद्र स्वरूप है उसको धारण करने से मनुष्य सर्वत्र विजय होता है।
1️⃣2️⃣बारह मुख वाला रुद्राक्ष को केशप्रदेश में धारण करें।उसको धारण करने से मानो मस्तक पर बारहो आदित्य विराजमान हो जाते हैं।
1️⃣3️⃣ तेरह मुख वाला रुद्राक्ष विश्वदेवो का स्वरुप है उसको धारण करके मनुष्य संपूर्ण अभिष्टो को प्राप्त करता है।तथा सौभाग्य और मंगललाभ करता है।
1️⃣4️⃣चौदह मुख वाला रुद्राक्ष परम शिव स्वरूप है।उसे भक्ति पूर्वक मस्तक पर धारण करें। इससे समस्त पापों का नाश हो जाता है।
मंगल की कामना चाहने वाले सभी स्त्री एवं पुरुषों को अपने सभी अभीष्ट कार्यों की सिद्धि के लिए रुद्राक्ष धारण करना चाहिए। रुद्राक्ष पूर्ण पवित्रता के साथ धारण करें। रुद्राक्ष असली एवं शुद्ध होना आवश्यक है।
जिस रुद्राक्ष को कीड़ों ने दूषित कर दिया हो,जो खंडित हो, फूटा हुआ हो ,जिसमें उभरे हुए दाने ना हो, जो व्रणयुक्त हो, जो पूरा- पूरा गोल ना हो, इन छह प्रकार के रुद्राक्ष को त्याग देना चाहिए।📿

जिस रुद्राक्ष में अपने आप ही डोरा पिरोने के योग्य छिद्र हो गया हो, वही रुद्राक्ष उत्तम माना गया है।📿
नमः शिवाय मंत्र द्वारा सभी रुद्राक्ष का पूजन कर उन्हें धारण किया जा सकता है। वैदिक एवं तांत्रिक बीज मंत्रों को सबके सामने प्रकट करना शास्त्र मर्यादा के विरुद्ध है।
शिव पुराण में भी रुद्राक्ष धारण के सभी मंत्र एवं विधान दिए गए हैं आप शिवपुराण द्वारा और अधिक जानकारी भी ले सकते हैं।रुद्राक्ष अभिमंत्रण एवं पूजन आप किसी भी योग्य कर्मकांडी ब्राह्मण द्वारा करा सकते हैं।
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महादेव आप सभी का कल्याण करें
हर हर महादेव
कपिल शर्मा (काशी)

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