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शरद /कोजागरी पूर्णिमा , शरद पूर्णिमा कब, क्या करें क्या नहीं सब कुछ बता रहे हैं पंडित कपिल शर्मा जी (काशी)

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पँ कपिल शर्मा काशी महाराज

शरद /कोजागरी पूर्णिमा… सालभर की पूर्णिमा में शरद पूर्णिमा का विशेष महत्व है। आश्विन मास की पूर्णिमा शरद पूर्णिमा होती है। इस साल शरद पूर्णिमा शरद पूर्णिमा है। इस बार शरद पूर्णिमा तिथि को लेकर भी कंफ्यूजन है। दरअसल इस बार शरद पूर्णिमा तिथि 30 अक्टूबर को शाम को 5.47 से लग रही है, जो 31 की रात 8:21 पर खत्म हो जाएगी. 30 अक्टूबर को पूर्णिमा तिथि आरंभ होने के कारण इसी दिन शरद पूर्णिमा मनाई जाएगी। उदया तिथि के अनुसार पूर्णिमा तिथि 31 अक्टूबर, शनिवार को रहेगा जिसके फलस्वरूप स्नान दान व्रत एवं धार्मिक अनुष्ठान इसी दिन संपन्न होंगे। क्योंकि कोई भी पूर्णिमा रात को ही मानी जाती है, इसलिए शरद पूर्णिमा कोजागरी पूर्णिमा 30 अक्टूबर, शुक्रवार को ही मनाना उत्तम रहेगा. खीर बना कर, इसी रात चन्द्रमा की किरणों में रखी जाएगी.

इस दिन की खास बात यह है कि चंद्रमा 16 कलाओं से परिपूर्ण होता है। इसे अमृत काल भी कहा जाता है। इस व्रत को आश्विन पूर्णिमा, कोजगारी पूर्णिमा, रास पूर्णिमा और कौमुदी व्रत के नाम से भी जानते हैं। मान्यता है कि इस दिन महालक्ष्मी का जन्म हुआ था। कहते हैं कि समुद्र मंथन के दौरान देवी लक्ष्मी प्रकट हुई थीं।

मान्यता है कि शरद पूर्णिमा के दिन मां लक्ष्मी भगवान विष्णु के साथ गरूड़ पर बैठकर पृथ्वी लोक में भ्रमण के लिए आती हैं। शरद पूर्णिमा के दिन मां लक्ष्मी घर-घर जाकर सभी को वरदान और कृपा बरसाती हैं। जो सोता रहता है, वहां माता लक्ष्मी दरवाजे से ही लौट जाती हैं। कहते हैं कि शरद पूर्णिमा के दिन माता लक्ष्मी कर्ज से भी मुक्ति दिलाती हैं। यही कारण है कि इसे कर्ज मुक्ति पूर्णिमा भी कहते हैं। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन पूरी प्रकृति मां लक्ष्मी का स्वागत करती है। कहते हैं कि इस रात को देखने के लिए समस्त देवतागण भी स्वर्ग से पृथ्वी आते हैं।

★जानें क्यों किया जाता है शरद पूर्णिमा व्रत :
एक पौराणिक कथा के अनुसार, एक साहूकार की दो बेटियां थीं। दोनों पूर्णिमा का व्रत रखती थीं। एक बार बड़ी बेटी ने पूर्णिमा का विधिवत व्रत किया, लेकिन छोटी बेटी ने व्रत छोड़ दिया। जिससे छोटी लड़की के बच्चों की जन्म लेते ही मृत्यु हो जाती थी। एक बार साहूकार की बड़ी बेटी के पुण्य स्पर्श से छोटी लड़की का बालक जीवित हो गया। कहते हैं कि उसी दिन से यह व्रत विधिपूर्वक मनाया जाने लगा।

★शरद पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त-
30 अक्टूबर की शाम 05:47 मिनट से 31 अक्टूबर की रात 08:21 मिनट तक।

शरद पूर्णिमा के दिन महालक्ष्मी की विधिवत पूजा की जाती है। मान्यता है कि मां लक्ष्मी भक्तों की सभी परेशानियां दूर करती हैं। शरद पूर्णिमा की रात्रि में चंद्र किरणों का शरीर पर पड़ना बहुत ही शुभ माना जाता है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार पूरे वर्ष में केवल इसी दिन चंद्रमा सोलह कलाओं का होता है और इससे निकलने वाली किरणें अमृत समान मानी जाती है। उत्तर और मध्य भारत में शरद पूर्णिमा की रात्रि को दूध की खीर बनाकर चंद्रमा की रोशनी में रखी जाती है। मान्यता है कि चंद्रमा की किरणें खीर में पड़ने से यह कई गुना गुणकारी और लाभकारी हो जाती है।
शरद पूर्णिमा के दिन लक्ष्मी कुबेर एवं इंद्र के पूजन का भी है विशेष महत्व धन संपत्ति की प्राप्ति के लिए की जाती है शरद पूर्णमा को लक्ष्मी की पूजा
जिन लोगो की पत्रिका में चन्द्र है कमजोर या पापग्रह की दृष्टि में है उन को करना चिये चन्द्र मन्त्र का जाप पूर्णिमा को चन्द्र उदय से मध्य रात्रि तक

 

पँ कपिल शर्मा काशी महाराज

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