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रक्षाबंधन के त्यौहार से जुडी रोचक लघुकथाएं | Interesting Short Stories related to raksha bandhan in Hindi | Raksha Bandhan Ki Kahaniyan

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Short Stories of Raksha Bandhan in Hindi

नमस्कार दोस्तों धर्म कथाएं डॉट कॉम वेबसाइट पर आपका स्वागत है। आज हम साल 2020 में रक्षाबंधन का त्योहार कब है, रक्षाबंधन का त्योहार कैसे मनाया जाता है और रक्षाबंधन त्योहार से जुड़ी रोचक लघुकथाओं के बारे में बात कर रहे हैं। हमारे देश में रक्षाबंधन का त्यौहार कई वर्षों से धूमधाम से मनाया जाता आ रहा है। यह त्यौहार भाई-बहन के प्यार का त्यौहार माना जाता है। इसमें बहन भाई के हाथों पर राखी बांधकर अपने भाई की लम्बी उम्र की प्रार्थना करती हैं। साल 2020 पर रक्षाबंधन का त्योहार 3 अगस्त सोमवार को मनाया जाएगा। सोमवार को शासकीय अवकाश भी रहेगा।

श्रावण पूर्णिमा को सावन का पांचवां सोमवार है। सुबह 6 बजकर 37 मिनट के बाद 28 योगों में सर्वश्रेष्ठ आयुष्मान योग इस समय विद्यमान रहेगा। सुबह 7 बजकर 18 मिनट के बाद पश्चात श्रवण नक्षत्र आ जाएगा, जो सिद्धि योग का निर्माण करेगा। सुबह 9 बजकर 28 मिनट पर भद्रा भी समाप्त हो जाएगी। इस साल पर्व पर सिद्धि और आयुष्मान योग बन रहे हैं। इन शुभ योग में रक्षाबंधन का पर्व भाई और बहनों की दीर्घायु, समृद्धि,सुख, सौभाग्य से परिपूर्ण रहेगा।

रक्षाबंधन से जुडी कहानियां (Stories of Rakshabandhan in Hindi)

राजा बलि और माता लक्ष्मी की रक्षाबंधन की कहानी (Raja Bali and Laxmi Rakshabandhan Story) हिंदू धामिक ग्रंथों में कहा जाता है कि रक्षाबंधन त्योहार की शुरुआत सतयुग में हुई थी। राक्षसों का राजा बलि भगवान विष्णु का परम भक्त था। बलि ने घनघोर तपस्या करने के बाद विष्णु भगवान से कहा कि वे अपने राज्य की रक्षा के लिए राजा बलि के राज्य में रहने आ जाएं। भगवान विष्णु, बलि के राज्य की रक्षा करने के लिए अपनी सामान्य जगह को छोड़कर आ गये। लेकिन इससे माता लक्ष्मी उदास हो गईं। वे चाहती थी कि उस समय भगवान विष्णु उनके साथ ही रहें। ऐसे में माता लक्ष्मी राजा बलि के पास पहुंची।

Rakshabandhan On 3 August

वहां माता लक्ष्मी राजा बलि के सामने ब्राह्मण महिला का रूप धारण करके गईं और राजा बलि से बोलीं, वे उसके महल में रहना चाहती हैं। बलि ने ब्राह्मण महिला को महल में रहने की आज्ञा दे दी। श्रावण पूर्णिमा के दिन माता लक्ष्मी ने बलि के हाथ में राखी बांधी पर बलि समझ नहीं पाया कि यह इस ब्राह्मण महिला ने मेरे साथ क्या किया। फिर माता लक्ष्मी ने राजा बलि को बताया कि वे वास्तविकता में कौन हैं और उनके महल में क्या कर रही हैं। मां लक्ष्मी ने जब बलि को छुआ तो भगवान विष्णु के लिए उनकी इच्छा और प्यार को देखते हुए बलि ने भगवान विष्णु को वैकुण्ठम जाने की स्वीकृति दे दी। उस घटना के बाद से एक परंपरा चली आ रही है, जिसमें बहन श्रावण पूर्णिमा के दिन अपने भाई की कलाई पर राखी बांधती है।

भगवान कृष्ण और द्रौपदी की कहानी (Krishana and Draupadi Rakshabandhan Story)

लोगों की भलाई के लिए भगवान कृष्ण ने दुष्ट राजा शिशुपाल को मार दिया था. युद्ध में श्री कृष्ण की एक ऊँगली पर घाव हो गया था. उस ऊँगली से खून निकल रहा था. उस समय द्रौपदी वहां मौजूद थी और द्रौपदी सब देख रही थी. उसने तुरंत ही भगवान कृष्ण की उँगली पर अपनी साड़ी का एक टुकडा फाड़ कर बाँध दिया. भगवान कृष्ण ने अपने प्रति द्रौपदी के मन की चिंता और प्रेम के कारण उन्होंने द्रौपदी को अपनी बहन मान लिया. भगवान कृष्ण ने द्रौपदी से कहा की अगर उसे भविष्य में कोई भी तकलीफ आई तो वे उसकी मदद के लिए हमेशा तैयार रहेंगे. कुछ वर्षों बाद पांडव द्रौपदी को कौरवों से पासे के खेल में हार गए थे. दुशासन ने द्रौपदी का चीरहरण किया था. उस समय भगवान ने द्रौपदी की साड़ी को अपनी शक्ति से बढ़ा दिया ताकि कौरव द्रौपदी के शरीर से साड़ी हटा ना सके.

रानी कर्णावती और हुमायूँ की कहानी (Rani Karnavati and Humayun Rakshabandhan Story)

हमारे इतिहास में रानी कर्णावती और हुमायूँ की कहानी रक्षाबंधन के मौके पर बेहद खास हो जाती हैं। मध्यकालीन दौर में जब राजपूत और मुसलमान आक्रमणकारियों में लड़ाई हो रही थी। उस समय राखी का महत्व बहुत ज्यादा था। उस समय आध्यात्मिक बंधन और बहनों की सुरक्षा को प्रमुख माना जाता था। चित्तौड़ के राजा की विधवा, रानी कर्णावती की सेना गुजरात के सुल्तानों से नहीं लड़ पा रही थी. रानी कर्णावती ने हुमायूँ को राखी भेजी. राखी से हुमायूँ खुश हुआ. जब हुमायूँ ने देखा की रानी कर्णावती की और उनके राज्य की स्थिति ख़राब थी. तो हुमायूँ ने बिना किसी देरी के अपने सैनिकों को रानी कर्णावती की मदद के लिए भेज दिया। इसके बाद से रक्षाबंधन की यह कहानी आज भी अमर है।

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रोक्साना और पोरस की कहानी (Roxana and Poras Rakshabandhan Story)

300 ईसा पूर्व में जब सिकंदर भारत पर आक्रमण करने आया था. तब उसका सामना पोरस से हुआ था. पोरस ने सिकंदर को पहली मुलाकात में अपनी क्षमताओं से हिला दिया था. इस सब से सिकंदर की पत्नी रोक्साना मायूस थी. उसे लगा कि सिकंदर पोरस से हार जायेगा. रोक्साना ने राखी त्यौहार के बारे में सुना तो उसने राजा पोरस को राखी बांध कर मनाया. राजा ने रोक्साना को बहन मान लिया. जब युद्ध के मैदान पर पोरस और सिकंदर आमने-सामने थे. तब पोरस सिकंदर को मारने की बजाये उससे अपना बचाव कर रहा था.

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