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एक माह का इंतजार, प्रारंभ होने जा रहा है श्राद्ध पक्ष

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Shraddha Karma Vidhi Mantra and puja vidhi

गणेश उत्सव समाप्त हो चुका है धूमधाम से बप्पा अपने धाम चले गए हैं। अब त्योहारों की कड़ी में सितंबर माह में अन्य फेस्टिवल शुरु होने जा रहे हैं। इस बार अधिक मास होने की वजह से एक माह आगे बढ़ गया है और अब गणेश उत्सव के बाद पितृ पक्ष का प्रारंभ होने जा रहा है। इसके उपरांत एक माह अधिक है और इसे ही अधिक मास कहा जाता है। इसके बाद ही शारदेय नवरात्र प्रारंभ होगा। इस वजह से अब शारदेय नवरात्र में एक माह का इंतजार करना होगा।

श्राद्ध कर्म और पितरों का तर्पण pitra paksha amavasya

1 सितंबर से शुरु पितृ पक्ष अब 17 सितंबर तक चलेगा, इस दौरान श्राद्ध कर्म और पितरों का तर्पण होगा। हालांकि इस वर्ष गया या फल्गु नदी के तट पर जिन स्थानों पर पितरों का तर्पण होता है। वहां हर साल मेला भरा जाता है किंतु इस बार मेला नही भरा जाएगा। कोरोना के चलते गाइड लाइन का पालन करते हुए इस वर्ष मेला आदि करने या भीड़ जमा करने की इजाजत नही है। हालांकि लोग अपनी सुविधा अनुसार ही पितरों का तर्पण या श्राद्ध की पूरी क्रिया करेंगे।

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मोक्ष या स्वर्ग को प्राप्त करते हैं पितर Pitru Paksha and moksha

मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक श्राद्ध कर्म करने पर परिवार में कोई क्लेश नही होता। हर कोई सुखी होता है हर जगह समृद्धि आती है। पितर भी मोक्ष या स्वर्ग को प्राप्त करते हैं। उनकी आत्मा को शांति मिलती है जिससे वे अपनी संतान या वंशजों को सुखी रहने का आशीर्वाद देते हैं। ऐसे लोगों को पितृ दोष से भी मुक्ति मिलती है।

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हर साल एकत्रित होते हैं लोग Pitru Paksha 2020 Date and time

गया में फल्गु नदी के तट पर हर साल ही तर्पण करने के लिए पितृ पक्ष में लोग एकत्रित होते हैं। यहां मौजूद पंडों के पास पूरा लेखा-जोखा होता है। इन्हीं के माध्यम से श्राद्ध कर्म की पूरी क्रिया करायी जाती हैै। मौसम के अनुसार फल्गु नदी में पानी नाम मात्र का ही देखने मिलता है किंतु संपूर्ण क्रिया इसी में पूर्ण होती है। इस नदी को श्राद्ध कर्म के लिए सबसे उर्पयुक्त माना जाता है। यहां हर ओर एक तर्पण करते हुए लोगों और पूजन विधि के दृश्य देखने आसानी से मिल जाएंगे।

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