श्रीमद् भागवत में गौसेवक संत कमलकिशोर नागर जी ने कहा, ‘नारी में स्वर्ण आभूषण से नहीं शरम से मर्यादा है’

कोटा, 28 नवबर। गौसेवक संत कमलकिशोर ‘नागरजी’ ने कहा कि ईश्वर ने हमें अनमोल कंचन काया बिनमोल दी है, फिर भी हमारा भरोसा उससे टूट रहा है। कोई कार्य नहीं होने पर हम कहते हैं ईश्वर ने मेरी नहीं सुनी। याद रखें, परमात्मा अचानक इंसान पर भरोसा नहीं करता है। पहले भजन व भक्ति करते हुए उससे मन के तार जोडो। उससे जुडने वालों को वो संभालता जरूर है। सुनेल-पाटन बायपास मार्ग पर कथा स्थल‘नंदग्राम’ में विराट श्रीमद् भागवत कथा महोत्सव के प्रथम सोपान में उन्होंने भक्ति और शौर्य की प्रतीक राजस्थान की माटी को नमन किया। उन्होंने कहा कि आज हर घर में तू-तू, मैं-मैं बहुत होती है। हम भजन और भक्ति से दूर होकर ‘मैं’ और ‘तू’ की लडाई कर रहे हैं।

‘मैं’ पाप है और तू पुण्य है

संत ‘नागरजी’ ने मैथी-चांवल से तत्वज्ञान देते हुए कहा कि गृह प्रवेश के समय उजला अन्न के रूप में चावल और हरी सब्जी का भोग लगाने की परंपरा है। चावल से पुण्य बढता है और हरी सब्जी से पाप घटता है। मुट्ठी भर कच्चे चावल पकने के बाद पूरी थाली भर देते हैं, इसी तरह, मैथी बनने के बाद घट जाती है। यही पाप और पुण्य को दर्शाता है।हम चावल की तरह मुट्ठी भर भजन करेंगे तो तपने के बाद पुण्य के प्रताप से भर जाएंगे, लेकिन ‘मैं’ को छोड दिया तो पाप घट जाएंगे। हमारा अंहकार इतना है कि हमेशा मैं’ को मन में रखते हैं और ‘तू’ यानी ईश्वर पर भरोसा नहीं करते हैं।

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पं.कमलकिशोर नागरजी ,

हर ‘ना‘ को ‘हा’ में बदलो

उन्होने कहा कि अपनी सोच को सकारात्मक बनाओ। भक्त और प्रहलाद अपनी सकारात्मक सोच व सेवा से ब्रह्यांड में में छाए। आप एक बार यह कहकर देखो- सब होगा, अच्छा होगा। भक्ति मन को प्रफुल्लित करती है।इसलिए हर काम में ‘ना’ को ‘हा’ में बदलकर देखो।

नारी में सोने से नहीं शरम से मर्यादा है

उन्होंने कहा कि नारी का मर्यादा से देवी स्वरूप के दर्शन होते हैं। नारी का सौंदर्य आभूषण से नहीं उसकी शरम देखना। जिस तरह, मां आंचल ढककर अपने शिशु को दुग्धपान कराती है, आप भी गौमुखी माला से उसी तरह ईश्वर का जप करके देखो। आपके भक्ति के तार उससे जुड जाएंगे। इसी तरह, जिस पुरूष में धर्म हो, वह दर्शनीय हो जाता है। अंत में उन्होंने भजन ‘मेरी प्रीत न छूटे रे मुरलीवाला से, कोई रोक सके तो रोक के बताए, अभी पाला नहीं पडा रखवाला से…’ सुनाया तो समूचा पांडाल भक्तिरस से सराबोर हो उठा।

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उत्सवी माहौल में निकली भव्य कलश यात्रा

कथा से पहले बुधवार सुबह 8 बजे कलश यात्रा खेडापति बालाजी मंदिर से शुरू हुई, जिसमें हजारों महिलाओं एवं नगरवासियों ने उत्सवी माहौल से सुनेल नगर में घाणा चैक, छत्री चैक, राममंदिर, रंजा चैक, शिवमंदिर व नवलपुरा होते हुए कथा स्थल नंद्रग्राम पहुंची। कलशयात्रा में महिलाएं सिर पर कलश लेकर भजन गाते हुए भक्तिरस बरसाते हुए निकलीं। जगह-जगह पुष्पवर्षा से कलशयात्रा का स्वागत किया गया।

कथा सूत्र-

-बाप जैसा बेटा हो, गुरू जैसा शिष्य हो और भगवान जैसा भक्त हो।
-सकारात्मक सोच स्वर्ग दिखाती है और नकारात्मक सोच नरक दिखाती है।
-दीनबंधु दीनानाथ, मेरी डोरी तेरे हाथ। उसमें ऐसा भरोसा बढाओ।
-भजन की अवधि बढाओ, वो अवश्य प्रकट होगा।
– भजन से मन प्रफुल्लित होगा, फिल्मी गानों से नहीं।

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