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Video: शीतला माता की प्रामाणिक कथा और पूजा विधि, Sheetla Mata की कथा सुनने से होती है हर मुराद पूरी

शीतला अष्‍टमी Sheetala Ashtami का त्‍योहार, जिसे बसौड़ा भी कहते हैं, माता शीतला को समर्पित होता है। होली के बाद इसे चैत्र कृष्‍ण पक्ष की अष्‍टमी पर मनाया जाता है।
शीतला माता का पर्व चैत्र मास में कृष्ण पक्ष की सप्तमी और अष्टमी तिथि Sheetala Ashtami को मनाया जाता है। शीतला माता अपने साधकों के तन-मन को शीतल करने और समस्त तापों का नाश करने वाली मानी गई हैं। शीतला माता का पर्व चाहे षष्टी को हो, सप्तमी को हो या अष्टमी को इसे दूसरे नामों से भी जाना जाता है, जैसे बसौड़ा अथवा बसियौरा भी इसे कहा जाता है। साल 2020 का शीतला माता पर्व 16 और 2020 Sheetala Ashtami Date 17 मार्च को मनाया जाएगा।

शीतला अष्टमी की कथा sheetala ashtami katha

पौराणिक कथा के अनुसार एक बार एक बूढ़ी औरत और उसकी दो बहुओं ने शीतला माता अष्टमी Sheetala Ashtami का व्रत रखा। जिसमें उन्होंने माता को बासी चावल चढ़ाए और खाए। लेकिन उन्होंने शीतला अष्टमी के दिन सुबह ही ताजा भोजन बना लिया। क्योंकि उनकी दोनों को हाल में ही संताने हुई थी। जिसकी वजह से उन्हें डर था कि उन्हें बासी भोजन से नुकसान पहुंच सकता है। जब सास को इस बारे में पता चला तो वह बहुत क्रोधित हुई। कुछ देर के बाद ही उनकी दोनो संतानों की मृत्यु हो गई। जब सास को यह पता चला तो उसने दोनो बहुओं को घर से निकला दिया
उस बुढ़िया की दोनो बहुएं बच्चों के साथ घर से निकला दिया। दोनो बहुएं चलते- चलते बहुत थक गई जिसके बाद वह आराम करने के लिए रूक गईं। वहां उन दोनों बहनों को ओरी और शीतला मिली। वह दोनों अपने सिर की जुओं से बहुत परेशान थी। बुढिया की बहुओं को दोनों बहनों को इस दशा में देखकर बहुत दया आ गई और दोनों बहुएं उनका सिर साफ करने लगी। कुछ देर के बाद जब दोनों बहनों को आराम मिल गया तो उन्होंने उन बहुओं को आर्शीवाद दिया की जल्द ही तुम्हारी कोख हरी हो जाए। यह देखकर दोनो बहने रोने लगी।

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जिसके बाद दोनों बहुओं ने अपने बच्चों के शव उन दोनों बहनों को दिखाए। ये सब देखकर शीतला ने उनसे कहा कि तुमने शीतला अष्टमी Sheetala Ashtami के दिन ताजा भोजन बनाया था। जिसकी वजह से तुम्हारे साथ ऐसा हुआ। यह सब जानकर उन्होंने शीतला माता से क्षमा याचना की। इसके बाद माता ने दोनों बच्चों के मृत शरीर में प्राण डाल दिए। जिसके बाद Sheetala Ashtami शीतला अष्टमी का व्रत पूरे धूमधाम से मनाया जाने लगा।

शीतला अष्टमी पूजा विधि sheetala ashtami puja vidhi in hindi

1. शीतला अष्टमी से एक दिन पहले ही सप्तमी के दिन मीठा भात, खाजा, चूरमा, कच्चा और पक्का खाना,नमक पारे, बेसन की पकौड़ी आदि बना लेनी चाहिए। यह सभी समान बनाकर आपको अगले दिन यानी शीतला अष्टमी की पूजा में रखना है और यदि आप रोटी बना रहे हैं तो ऐसी रोटी बनाएं जिसमें लाल रंग के सिकाई के निशान न हो।
2.बसोड़े के दिन यानी शीतला अष्टमी Sheetala Ashtami के दिन ठंडे पानी से नहाएं और साफ वस्त्र धारण करें।
3. इसके बाद एक कड़वारे भरे। कड़वारे में रबड़ी, चावल, पुए,पकौड़े और कच्चा पक्का खाना रखें।

4.इसके बाद एक दूसरी थाली में काजल, रोली,चावल, मौली, हल्दी, होली वाले बड़गुल्लों की एक माला व एक रूपए का सिक्का रखें।

5. बिना नमक का आंटा गूथकर उससे एक दीपक बनाएं और उसमें रूई की बाती घी में डुबोकर लगाएं।

6. यह दीपक बिना जलाए ही माता शीतलो चढ़ा दें। पूजा की थाली पर कंडवारो से तथा घर के सभी सदस्यों को रोली और हल्दी से टिका लगाएं।

7. इसके बाद मंदिर में जाकर पूजा करें या शीतला माता घर हो तो सबसे पहले माता को स्नान कराएं।

8.इसके बाद रोली और हल्दी से मां का टीका करें।

9. माता शीतला को काजल, मेहंदी, लच्छा और वस्त्र अर्पित करें। तीन कंडवारे का समान अर्पित करें। बड़ी माता बोदरी और अचपडे के लिए

10. माता शीतला को बड़गुल्ले अर्पित करें। आटें का दीपक बिना जलाएं अर्पित करें। इसके बाद मां की आरती उतारें।

11. माता को भोग की चीजें अर्पित करें और जल चढ़ाएं और जो जल बहे। उसमें से थोड़ा सा जल लोटे में डाल लें

12. इसके बाद यह जल घर में छिड़क दें। इससे घर की शुद्धि होती है और घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है।

शीतला अष्टमी का महत्व significance of sheetala ashtami

हिन्दू धर्म के अनुसार माता शीतला अष्टमी Sheetala Ashtami को महिलाएं अपने परिवार तथा बच्चो की सलामती के लिए एवम घर में सुख,शांति के लिए रंग पंचमी से अष्टमी तक माता शीतला को बासौड़ा बनाकर पूजती है। शीतला माता की पूजा बसंत और ग्रीष्म ऋतु में ही होती है। चैत्र, वैशाख, ज्येष्ठ और आषाढ़ के कृष्ण पक्ष की अष्टमी शीतला देवी की पूजा अर्चना करने के लिए समर्पित है। इसलिए ये दिन शीतला अष्टमी के नाम से जाना जाता है। Sheetala Ashtami

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