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तोते ने सुनी भागवत कथा फिर घर जाकर भी बताया कथा का सार, पं. अंकित कृष्ण महाराज जी के सामने झूम उठे दर्शक

pt ankit krishna maharaj ji

भोपाल की पुष्पानगर कॉलोनी की भागवत में श्रद्धालु तो उमड़े ही है, साथ मेंं एक तोते के  जोड़े ने कथा में पहुंच, रोचकता और बढ़ा दी। कहा जा रहा है कि यह खास तोते हैं जो कथा सुनकर कथा का सार घर जाकर भी सुनाते हैं। इसका यू ट्यूब पर वीडियो जमकर देखा जा रहा है। इन तोते के जोड़े की हर कोई तारिफ करते नहीं थक रहा आप भी देखिए वीडियो में कि कैसे यह तोते नाचते हुए कथा का आनंद ले रहे है। कथा में पंडित अंकितकृष्ण महाराज ने रामायण और महाभारत से जुड़े रोचक तथ्य गीत संगीत के साथ सुनाए तो श्रद्धालुओं के साथ तोते के जोड़े भी नाचने लगे। इन्हें देख हर कोई हैरान हो रहा है।

भोपाल- स्टेशन के पास पुष्पा नगर कॉलोनी में 80 फीट रोड पर चल रही श्रीमद् भागवत कथा में गौवत्स पंडित अंकितकृष्ण महाराज ने कहा कि श्रीमद्भागवत कथा मानव को मृत्यु के भय से मुक्त कर देती है। श्रद्धालुओं को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि परमात्मा की विशेष कृपा हुई है, जो आप और हम यहां इकट्ठे हुए हैं,उन्होंने कहा कि जीव ईश्वर का स्वरूप होते हुए भी ईश्वर को पहचानने का प्रयत्न नहीं करता है। इसी कारण उसे आंनद की प्राप्ति नहीं होती है और वह सांसारिक वस्तुयों में उलझा रहता है । आज के समय में हमारे पास इतनी व्यस्तता है कि न तो पूजन करने के लिए समय है और न ही तीर्थ यात्राओं में दर्शन करने हम निकल पाते हैं।

महाराज बटुकजी ने कहा कि ऐसे में हमें अपने जीवन सत्संग का लाभ जरुर लेना चाहिए, भागवत भी दर्शन का ग्रंथ है। यह जीवन जीने की कला का मार्ग दर्शन करता है। अर्थात हमें जीवन जीना सीखाती है भागवत, उन्होंने कहा कि भागवत की भक्ति का आदर्श कृष्ण की गोपियां हैं। गोपियों ने घर नहीं छोड़ा। उन्होंने स्वधर्म त्याग नहीं किया वे वन में नहीं गई फिर भी वह श्री भगवान को प्राप्त कर सकीं। महाराज श्री ने कहा कि भागवत ज्ञान, वैराग्य को जागृत करने की कथा है। ज्ञान और वैराग्य मनुष्य के अंदर हैं, पर वह सोए हुए हैं। भागवत के अलावा अन्य कोई ग्रंथ नहीं जो मनुष्य मात्र को सात दिन में मुक्ति का मार्ग दिखा दे। राजा परीक्षित ने भी 7 दिन में कथा सुनी और मोक्ष की प्राप्ति की। भगवान की कृपा प्राप्त करने के लिए हमें भगवान की शरण में ही जाना पड़ेगा। उनके दर्शन और प्रभु नाम का गुणगान करना ही होगा ।

इस मौके पर आयोजन समिति के उदयराज शुक्ला, हरिओम राधे, सुजीत गुप्ता, अनूप खत्री, रामेश्वर पटवा, योगेश कुशवाह समेत बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी मौजूद थे। अंत में मुख्य यजमान हरिनारायण विश्मकर्मा ने व्यास गादी की पूजा अर्चना के साथ आरती की । आचार्य सतेंद्र शास्त्री ने बताया कि कथा के दूसरे दिन महाभारत प्रसंग, शुकदेव और पारिक्षित जन्म से संबंधित कथा होगी, कथा 24 जनवरी तक प्रतिदिन दोपहर 2 से शाम 5 बजे तक चल रही है। जिसमें बड़ी संख्या में क्षेत्रवासी पहुंच रहे हैं।

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