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कड़वे प्रवचन देकर जिन्दगी में मिठास भरने वाले मुनि का अंतिम विहार

भावपूर्ण श्रद्धांजली @ स्वप्निल व्यास, इंदौर

तुम्हारी वजह से जीते जी किसी की आंखों में आंसू आए तो यह सबसे बड़ा पाप है। लोग मरने के बाद तुम्हारे लिए रोए, यह सबसे बड़ा पुण्य है। इसीलिए जिंदगी में ऐसे काम करो कि, मरने के बाद तुम्हारी आत्मा की शांति के लिए किसी और को प्रार्थना नहीं करनी पड़े। क्योंकि दूसरों के द्वारा की गई प्रार्थना किसी काम की नहीं है।
जैन मुनि तरुण सागर का शनिवार को सुबह निधन हो गया। 51 वर्षीय जैन मुनि लंबे समय से बीमार चल रहे थे। पूर्वी दिल्ली के कृष्णा नगर इलाके में स्थित राधापुरी जैन मंदिर में सुबह करीब 3 बजे उन्होंने अंतिम सांस ली।
दिगंबर जैन मुनि को उनके प्रवचनों के लिए जाना जाता है। ‘कड़वे प्रवचन’ के नाम से समाज को वह संदेश देते थे। वह समाज और राष्ट्र जीवन के अहम मुद्दों पर तीखी शब्दों में अपनी राय दिया करते थे। जैन समाज में खासे लोकप्रिय रहे तरुण सागर बीते काफी दिनों से पीलिया से पीड़ित थे।
करीब 20 दिनों पहले उन्हें इलाज के लिए एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। इलाज के बावजूद स्वास्थ्य में सुधार न होने पर उन्होंने अपना इलाज बंद करा लिया था। जैन संत तरूण सागर जी महाराज अपने कड़वे प्रवचनों के कारण ही जन जन में लोकप्रिय हुए । वे तीखे और ओजस्वी विचारों से लोगों को मीठी बातें बताते हुए श्रेष्ठ जीवन जीने की राह सिखाते थे और उनके कड़वे प्रवचनों में अमृत की मधुर मिठास भरी रहती थी ।उनका  इतनी जल्दी महा विहार को निकाल पड़ना सिर्फ जैन समाज ही नही पुरे देश के लिए शती है।
ॐ शांति..शांति…शांति..

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