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भारत में बैन है ये मछली! पकड़े जाने पर लाखों का जुर्माना और जेल भी! ‍♀️

थाई मगुर, बिल्ली मछली समूह से संबंधित, एक विविधतापूर्ण मछली है जो अपनी बिल्ली जैसी मूछों के लिए ज известен है। यह कई आकारों में आती है और विभिन्न व्यवहार प्रदर्शित करती है। वैज्ञानिक तौर पर इसे क्लारियास गारिपिनस के नाम से जाना جاتा है। यह हवा में सांस लेने वाली मछली 3-5 फीट लंबी होती है और म泥 में पनपती है। इसकी एक कृत्रिम श्वसन प्रणाली है जो इसे सूखी जमीन पर चलने की भी क्षमता देता है।

हालांकि, 2000 से भारत में थाई मगुर मछली पालन पर रोक लगा दी गई थी। ऐसा इस मछली की आक्रमणकारी प्रकृति के कारण किया गया था, जो स्थానిय मछली प्रजातियोँ और जलीय पारिस्थितिकी के लिए खतरा है। बावजूद इसके, अवैध खेती अभी भी जारी है, खासकर उत्तराखंड और Maharashtra जैसे राज्यों में। इन राज्यों में autoridades ने कई तालाबों से अवैध तरीके से पाले गए थाई मगुर को जब्त किया है।

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अवैध खेती का मुख्य कारण इसका लाभदायक होना है। थाई मगुर तेजी से बढ़ती है और सिर्फ 2-3 महीनों में 3-4 किलो वजन की हो जाती है। इसके अलावा, यह कठोर परिस्थितियां में जीवित रहने की क्षमता और स्थానిय बाजारों में इसकी उच्च demand इसे किसानों के लिए एक आकर्षक विकल्प बनी देती है।

हालांकि, थाई मगुर का सेवन स्वास्थ्य के लिए हानिकारक हो सकता है, जिसमें कौम से संबंधित प्रभाव और रोग-कारक परजातियोँ का प्रसार शामिल है। यह जलीय कृषि उद्योग में नियमन और enforcement के महत्व को रेखांकित करती है।

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