11 जुलाई से शुरू हो रही है कांवड़ यात्रा!

शिवलिंग पर जल चढ़ाना शिव की कृपा पाने का पवित्र उपाय मानी जाती है।

कहते हैं, रावण ने भी शिव को प्रसन्न करने के लिए कांवड़ यात्रा की थी।

श्रावण मास में शिव की आराधना से विशेष फल मिलता है।

नंगे पांव चलना, जल उठाना और मौन रहना मन को संतुलित करता है।

इस यात्रा से नकारात्मक ऊर्जा खत्म होती है और सकारात्मक ऊर्जा बढ़ती है।

तपस्या जैसी यह यात्रा भक्त को भीतर से मजबूत बनाती है।

लंबी पैदल यात्रा शरीर की सहनशक्ति और फेफड़ों की क्षमता बढ़ाती है।

इस साल कांवड़ यात्रा 11 जुलाई और जलाभिषेक 21 जुलाई को है।