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जब मंथरा दासी के साथ से कैकेयी के मन के संकल्प बिगड़े

बिनु सत्संग विवेक ना होई….सत्संग तारता है और कुसंग डूबोता है। अच्छे संग से अच्छे संकल्प तथा कर्म होते हैं। मंथरा दासी के संग से कैकेयी के मन के संकल्प बिगड़े। यह कुसंग का फल है। सत्संग से ही सत्य को समझा जा सकेगा। सुख पाने और दुःखों की चोटों से बचने के लिए सत्संग करना चाहिए। किसी व्यक्ति के जीवन में सत्संग होगा अथवा नहीं, उसके जीवन में जो उसे साथ मिलेगा वह सुख प्राप्ति का साधन होगा अथवा दुखों का मार्ग यह जानकारी उस व्यक्ति की कुंडली से ज्ञात किया जा सकता है।

यदि किसी व्यक्ति की कुंडली का पंचमेश, सप्तमेश अथवा एकादशेष अनुकूल, उच्च अथवा सौम्य ग्रहों से युत हो तो ऐसे व्यक्ति का संत्संग उसके विवेक को बढ़ाने वाला सुख तथा उन्नति के मार्ग पर ले जाता है वही इसके विपरीत होने पर अवनति तथा दुख का कारण होता है। अतः किसी को अच्छा साथ न मिले अथवा उसे अपने साथ वालो से अथवा दोस्तो, सहयोगियो या पड़ोसियों से अवनति अथवा दुख मिले तो संग का ज्ञान करना चाहिए और उक्त ग्रहों को अनुकूल करने का प्रयास करने से सुख तथा उन्नति प्राप्त की जा सकती है।

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