ईसाई धर्म कथाएंधर्म कथाएंधार्मिक स्थल

क्रिश्चियन त्योहार 25 दिसंबर : ईश्वर के बेटे ईसा मसीह की आधी रात को धरती पर उतरने की कहानी

हर साल प्रभु यीशु मसीह के जन्मोत्सव के रुप में मसीह समुदाय द्वारा क्रिसमस का त्योहार 25 दिसंबर को मनाया जाता हैं। क्रिश्चियन समुदाय का यह सबसे बड़ा और खुशी का त्योहार होता है, यही वजह हैं कि इस दिन को बड़ा दिन के रुप में भी पहचाना जाता हैं। क्रिसमस को भले ही ईसा मसीह के जन्मोत्सव के रुप में मनाते हों, लेकिन ईसाई विद्वान इस बात पर लगभग एकजुट हैं, कि ईसा के जन्म का वास्तविक दिन यह नहीं हैं। हालांकि जब यूरोप में ईसाई धर्म पहुंचा तो उस वक्त यूरोप में पहले से ही ढेर सारे त्योहार प्रचलित थे।

सच्ची धार्मिक कहानियां पढऩे के लिए फेसबुक पेज लाइक करें-  https://www.facebook.com/DharmKathayen/

जिनमें प्रमुख 25 दिसंबर को सूर्य के उत्तरायण होने का पर्व था। इस तारीख से दिन लंबा शुरु होने लगता हैं। इस कारण इसे सूर्य देवता के पूनर्जन्म का दिन भी माना जाता था। ईसाई परंपराओं और यूरोप में पहले से प्रचलित परंपराओं का संगम हुआ, उसके परिणामस्वरुप सूर्यदेवता के पुनर्जन्म का पर्व ईसा के जन्मोत्सव के रुप में भी मनाए जाने लगा।

यह भी पढ़ें:- माता मरियम ने पूरी की थी मन्नत, पढि़ए एक सच्ची दास्तां

15 दिन पहले से तैयारियां

ईसाई समुदाय इस पर्व को मनाने के लिए करीब 15 दिन पहले से तैयारियां शुरु कर देता हैं। तैयारियां में घरों की साफ-सफाई, रंगरोगन करना, नए कपड़े खरीदी, पकवान बनाना आदि काम में जुट जाते हैं। वहीं क्रिसमस के मौके पर चर्चों को बहुत सुंदर ढंग से सजाया जाता हैं। कार्यक्रम भी होते हैं। चर्चों में होने वाले कार्यक्रमों में यीशु मसीह पर जन्म गाथा को नाटक के रुप में प्रदर्शित करते हैं। मसीह गीतों की अंताक्षरी खेली जाती हैं। कई प्रकार के गेम्स होते हैं और प्राथनाएं की जाती हैं। कई स्थानों पर जुलूस-सभा होते हैं।

चर्च ने बसाया कुनकुरी शहर (kunkuri catholic church jashpurnagar in hindi)

छत्तीसगढ़ के जशपुर जिले के कुनकुरी में एशिया का दूसरा सबसे बड़ा चर्च है। क्रिसमस पर्व पर कुनकुरी में अलग ही धूम होती हैं। इसकी वजह है कुनकुरी का विशाल-खूबसूरत चर्च जो अपनी पहचान इंटरनेशनल लेवल पर हैं।
खास बात यह है कि इस चर्च की पूरी बिल्डिंग एक ही बीम पर टिकी हुई है। दुनियाभर से इस चर्च को देखने के लिए लोग कुनकुरी आते हैं। बदलते समय के साथ कुनकुरी अब गांव से शहर बन चुका है। जशपुर जिले में ईसाई धर्म को मानने वालों की संख्या करीब 2 लाख से अधिक हैं। 25 दिसंबर को ईसाईयों का सबसे बड़ा पर्व क्रिसमस है। इसी मौके पर धर्म कथाएं डॉट कॉम आपको बता रहा है कुनकुरी चर्च के बारे में कुछ खास बातें…
जशपुर जिले के कुनकुरी से 11 किमी दूर गिनाबहारा में इस क्षेत्र का पहला चर्च बनाया गया। उस दौर में कुनकुरी बहुत छोटा सा गांव था। लेकिन एशिया के दूसरे सबसे बड़े चर्च की स्थापना के बाद कुनकुरी गांव से शहर के रुप में विकसित हो गया। कुनकुरी में महागिरजाघर बनने के बाद यहां लोयोला स्कूल और हॉली क्रॉस अस्पताल की स्थापना की गई।

यहां देखें लेटेस्ट वीडियो :-

 

क्रिसमस पर्व पर यहां देश ही नहीं विदेशों से भी श्रद्धालु प्रभु यीशु की प्रार्थना करने आते हैं। इस चर्च की आधारशिला 1962 में रखी गई थी और निर्माण 1979 में पूरा हुआ। वहीं लोकार्पण 1982 में किया गया। जशपुर जिले में ईसाई धर्म को मानने वालों की संख्या करीब 2 लाख से अधिक हैं। 25 दिसंबर को ईसाईयों का सबसे बड़ा पर्व क्रिसमस है। Kunkuri is a small town in Chhattisgarh, India. It is a tehsil of Jashpur district, It has Asia’s second largest Catholic church, the CathedraOur Lady of the Rosary, in the Roman Catholic Diocese of Jashpur,

Leave a reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.

Technically Supported By : Infowt Information Web Technologies