धर्म कथाएं

जानिए क्यों चढ़ाई जाती है भगवान गणेश को दूर्वा

प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश को दूर्वा बेहद प्रिय है. भगवान गणेश को दूर्वा चढ़ाने से एक प्राचीन कथा जुड़ी है आइए आपको बताते हैं.

भगवान श्री गणेश (Lord Ganesha) को वैसे तो कई तरह के फूल और पूजन सामग्री अर्पित की जाती है लेकिन बिना दूर्वा के भगवान गणेश की कृपा प्राप्त करना मुश्किल है जैसे शिवजी को बेलपत्र बेहद प्रिय हैं श्रीहरि भगवान विष्णु को तुलसी प्रिय है वैसे ही प्रथम पूज्य भगवान श्री गणेश को दूर्वा बेहद प्रिय है. भगवान गणेश को दूर्वा चढ़ाने से एक प्राचीन कथा जुड़ी है आइए आपको बताते हैं.

कहते हैं प्राचीन काल में अनलासुर नाम का एक दैत्य था जो कि ऋषि मुनियों को साधारण मनुष्यों को परेशान करता था और उन्हें जिंदा निगल जाया करता था. उस राक्षस के आंतक से देवी-देवता के साथ ही समस्त ऋषि मुनि और मानव परेशान थे. (benefits of offering durva to ganesh) उसके त्रास से स्वर्ग और पृथ्वी लोक दोनों जगह त्राहि-त्राहि मची थी. राक्षस अनलासुर से परेशान होकर देवताओं ने भगवान शिव से उसका अंत करने की प्रार्थना की. तब भगवान शिव ने बताया कि राक्षस अनलासुर का खात्मा केवल भगवान श्री गणेश कर सकते हैं देवताओं ने भगवान गणेश से राक्षस के खात्में की प्रार्थना की. सभी देवताओं की प्रार्थना स्वीकार कर भगवान गणेश ने राक्षस अनलासुर को निकल लिया, लेकिन राक्षस को निगलने के बाद भगवान गणेश को पेट में जलन होने लगी. (benefits of offering durva to ganesh) भगवान गणेश को पीड़ा मुक्त करने के लिए कई उपाय किए गए लेकिन किसी से कोई लाभ नहीं हुआ इसी दौरान भगवान गणेश को दूर्वा की 21 गांठे खाने के लिए दी गई. दूर्वा को खाते ही भगवान गणेश के पेट में होने वाली जलन बंद हो गई. ऐसा माना जाता है कि तबसे ही भगवान गणेश को दूर्वा चढ़ाने की परंपरा शुरू हुई, और इसी वजह से भगवान गणेश को दूर्वा बेहद प्रिय है.

दूर्वा से जुड़ी खास बातें Why is Durva offered to Lord Ganesha?

1. भगवान गणेश को दूर्वा अधिक प्रिय है. अतः सफेद या हरी दूर्वा चढ़ानी चाहिए. दूर्वा शब्द दो शब्दों से मिलकर बना है. जिसका अर्थ होता है गणेश के दूरस्थ पवित्रकों को पास लाने वाला. (benefits of offering durva to ganesh) 

दूः+अवम्‌, इन शब्दों से दूर्वा शब्द बना है।

‘दूः’ यानी दूरस्थ व ‘अवम्‌’ यानी वह जो पास लाता है।

2. भगवान गणेश को हमेशा ताजी और कोमल दूर्वा ही अर्पित करें, सूख जाने पर यह आम खास जैसी हो जाती है.

3. भगवान गणेश को हमेशा विषम संख्या में दूर्वा अर्पित करें जैसे 7,9,11.

4. यदि आप हर दिन गणेश जी को दूर्वा अर्पित नहीं कर पाते तो कोशिश करें कि बुधवार को भगवान गणेश को दूर्वा जरुर अर्पित करें.

5 . भगवान गणेश को दूर्वा हमेशा उनकी प्रतिमा की समिधा की लंबाई के अनुसार ही दूर्वा अर्पित करें.

6. दूर्वा को बांध कर अर्पित करें इससे वो देर तक जाता रहेगी और उसकी सुगंध भी देर तक बनी रहेगी. दूर्वा को देर तक ताजा रखने के लिए उसे पानी में भिगा कर भी अर्पित कर सकते हैं ऐसा करने से पवित्रक ज्यादा समय तक मूर्ति में बने रहते हैं.

7. भगवान गणेश को कभी दूर्वा कभी भी अर्पित नहीं करनी चाहिए. न ही दुर्गा जी को कभी दूर्वा अर्पित करनी चाहिए. इस बात का कार्तिक माहात्म्य में किया गया है.

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8. भगवान गणेश को दूर्वा के साथ ही गुड़हल का लाल फूल चढ़ाने से भी उनकी कृपा जल्दी प्राप्त होती है,और मनोकामना शीघ्र पूरी होती है.

9. भगवान गणेश को चांदनी चमेली या परिजात के फूल भी दूर्वा के साथ अर्पित किए जा सकते हैं. इससे भी विघ्नहर्ता जल्दी प्रसन्न होते हैं.

10. गणपति का वर्ण लाल है, इसलिए उनकी पूजा में लाल वस्त्र, लाल फूल और लाल रक्त चंदन का प्रयोग करना चाहिए. दूर्वा की कोमल पत्तियां भगवान गणेश के पेट में रखने से उन्हें हर व्याधि से आराम मिलता है. (benefits of offering durva to ganesh) 

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